SaudiEconomy – पश्चिम एशिया संकट के बीच सऊदी ने रोके नए कॉन्ट्रैक्ट
SaudiEconomy – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर अब खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने कई पश्चिमी परामर्श कंपनियों के साथ नए अनुबंधों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही कुछ भुगतान प्रक्रियाओं में भी देरी की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि बढ़ते वित्तीय दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच सऊदी सरकार खर्चों को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय तक चले तनाव का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री मार्ग प्रभावित होने के कारण तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा है।
परामर्श कंपनियों को मिले संकेत
बताया जा रहा है कि सऊदी सरकार ने औपचारिक घोषणा किए बिना कई अंतरराष्ट्रीय कंसल्टिंग कंपनियों को नए समझौतों को लेकर इंतजार करने के संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में मैकिन्से, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और अन्य वैश्विक सलाहकार कंपनियों का उल्लेख किया गया है।
कुछ अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि भुगतान प्रक्रिया को फिलहाल आगे बढ़ाने के बजाय दूसरी तिमाही के अंत तक टालने की बात कही गई है। वहीं नए प्रोजेक्ट्स और अनुबंधों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि इस संबंध में सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है।
विजन 2030 पर बढ़ सकता है दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ‘Vision 2030’ योजना से भी जुड़ा हो सकता है। इस योजना का उद्देश्य सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालना और अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है।
लेकिन हालिया भू-राजनीतिक तनाव और रक्षा जरूरतों के कारण सरकारी खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और लाल सागर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ सकती है। इसका असर अन्य विकास परियोजनाओं के बजट पर भी पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय ने दिया जवाब
सऊदी अरब के वित्त मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सभी निवेश और परामर्श सेवाओं की समीक्षा रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर करती है। मंत्रालय का कहना है कि भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं।
मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2026 के दौरान अधिकांश भुगतान निर्धारित समयसीमा के भीतर किए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि Vision 2030 से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर उसकी प्रतिबद्धता पहले की तरह बनी हुई है।
क्षेत्रीय तनाव अब भी बरकरार
हालांकि कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है और इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर देखा जा रहा है।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई देश अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों की फिर से समीक्षा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर और गहरा हो सकता है।