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RepoRate – आरबीआई ने दरें स्थिर रखीं, ईएमआई में राहत टली

RepoRate – भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से यह कदम उठाया है। इसका सीधा असर आम लोगों पर यह होगा कि फिलहाल होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई में कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। यानी कर्ज सस्ता होने के लिए अभी इंतजार करना होगा।

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मौजूदा हालात को देखते हुए लिया गया फैसला

आरबीआई ने यह निर्णय ऐसे समय में लिया है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय स्थिति को स्थिर रखने को प्राथमिकता दी है, ताकि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बना रहे।

आगे क्या बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा पूरी तरह महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहते हैं और महंगाई दबाव में आती है, तो आरबीआई भविष्य में दरों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति पर काम कर रहा है।

नीति घोषणा और प्रसारण की जानकारी

आरबीआई की यह द्विमासिक बैठक 6 से 8 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थी, जिसमें लिए गए फैसलों की घोषणा 8 अप्रैल को सुबह की गई। इसके बाद गवर्नर ने दोपहर में मीडिया को संबोधित भी किया। यह पूरी प्रक्रिया आरबीआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित की गई, जिससे आम लोग और निवेशक सीधे जानकारी प्राप्त कर सके।

विशेषज्ञों की राय क्या कहती है

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल दरों को स्थिर रखना एक संतुलित कदम है। मुथूट फिनकॉर्प की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावड़ेकर के अनुसार, जीडीपी वृद्धि में संभावित नरमी और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए दरों में बदलाव से बचना उचित है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा स्तर पर वास्तविक ब्याज दरें ऊंची हैं, जो धीरे-धीरे घट सकती हैं और इससे निवेश तथा खपत को समर्थन मिल सकता है।

कटौती का दौर थमा या आगे मौका?

कुछ वित्तीय संस्थानों का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती का चरण अब लगभग समाप्त हो चुका है। महंगाई के संभावित दबाव और रुपये की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाए हुए है। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि तत्काल दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है, क्योंकि अर्थव्यवस्था अभी संतुलित स्थिति में है।

निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए संकेत

आरबीआई के इस फैसले से यह साफ है कि फिलहाल स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि बाजार में अचानक बड़े बदलाव की संभावना कम है, जबकि आम उपभोक्ताओं को लोन की लागत में राहत के लिए कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है।

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