LandDisputeCase – जदयू विधायक समेत तीन पर गैर-जमानती वारंट जारी
LandDisputeCase – बिहार में जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में सियासी हलचल तेज हो गई है। कुचायकोट से जदयू विधायक अमरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और एक अन्य आरोपी के खिलाफ एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। तीनों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन कब्जाने की साजिश रची।

वारंट जारी होने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज
अदालत के आदेश के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई है। कुचायकोट थाना पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दो अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक वारंट जारी होने की जानकारी मिलते ही तीनों आरोपी फरार हो गए हैं और फिलहाल पुलिस की पहुंच से बाहर बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश जारी है।
जमीन कब्जाने की साजिश का आरोप
यह मामला एक बड़े भूखंड से जुड़ा है, जिसे लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता जितेंद्र राय ने आरोप लगाया है कि बेलवा गांव स्थित करीब 16 एकड़ से अधिक जमीन को कब्जाने की नीयत से आरोपितों ने दबाव बनाया।
एफआईआर में कहा गया है कि आरोपितों ने जमीन मालिक से अपने नाम रजिस्ट्री कराने के लिए कहा और जब बात नहीं बनी तो जबरन कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान वहां बने कमरों के ताले तोड़कर अपने ताले लगा दिए गए। आरोप यह भी है कि डराने के उद्देश्य से गोलीबारी की गई।
घटना के दिन क्या हुआ
शिकायत के अनुसार, एक अप्रैल को जब शिकायतकर्ता अपने सहयोगी के साथ खेत पर पहुंचे, तब वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। खेत में गेहूं की फसल तैयार थी और कटाई का समय नजदीक था। इसी दौरान कथित रूप से विवाद बढ़ा और आरोपितों ने धमकी दी।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब फायरिंग की बात सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
कुछ आरोपित गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें भोला पांडेय उर्फ राकेश पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार और नीतीश कुमार शामिल हैं। हालांकि इस मामले में नामजद एक अन्य आरोपी राहुल तिवारी उस समय फरार हो गया था।
अब अदालत के वारंट के बाद विधायक, उनके भाई और अन्य आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपितों की भूमिका की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
मामले पर बढ़ी नजरें
चूंकि इस प्रकरण में एक जनप्रतिनिधि का नाम सामने आया है, इसलिए मामला संवेदनशील माना जा रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती भी प्रशासन के सामने है।
फिलहाल पुलिस का फोकस आरोपितों की गिरफ्तारी और पूरे मामले की तह तक पहुंचने पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।