Noida – नोएडा हिंसा पर सियासत तेज, आमने-सामने आए सरकार और विपक्ष
Noida – नोएडा में हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्म हो गई है। योगी सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस तरह की घटनाएं कराई जा रही हैं। हाल के दिनों में मेरठ और नोएडा से कुछ संदिग्धों की गिरफ्तारी का भी हवाला देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि बाहरी तत्वों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

सरकार ने जताई सुनियोजित साजिश की आशंका
श्रम मंत्री ने कहा कि जिस समय प्रदेश में बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं, उसी दौरान इस प्रकार की घटनाएं सामने आना संदेह पैदा करता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुजफ्फरनगर दौरे को प्रभावित करने के लिए भी इस तरह की स्थिति बनाई गई हो सकती है। उनके अनुसार, प्रदेश सरकार की बढ़ती स्वीकार्यता से कुछ असामाजिक और देश विरोधी तत्व असहज हैं, जो माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
श्रमिकों से संयम और संवाद बनाए रखने की अपील
अनिल राजभर ने श्रमिकों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों की समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। उग्र प्रदर्शन या हिंसक रास्ता अपनाने से स्थिति और जटिल हो सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार संवाद की प्रक्रिया जारी है और संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर हालात पर नजर
सरकार के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों की टीम नोएडा में तैनात की गई है, जो श्रमिकों से सीधे बातचीत कर रही है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन भी पहले से स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास में श्रमिकों की भूमिका अहम है और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ‘श्रमेव जयते’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि श्रमिक कल्याण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
विपक्ष ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस घटना को साजिश बताया जा रहा है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि खुफिया तंत्र इस बारे में पहले से क्यों सतर्क नहीं था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मजदूरों के मुद्दों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, न कि उन्हें आरोपों में उलझाने की।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ी तकरार
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को नजरअंदाज कर उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई और आर्थिक दबाव पहले से ही लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह संवेदनशीलता के साथ हालात को संभाले और श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दे।



