PMModiVisit – डाट काली मंदिर में पूजा के साथ पीएम ने दिया ये बड़ा संदेश
PMModiVisit – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले देहरादून स्थित प्रसिद्ध डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर पहुंचकर उन्होंने मां काली के पिंडी स्वरूप के दर्शन किए और पारंपरिक तरीके से पूजा संपन्न की। इस दौरान उन्होंने पंचमेवा और फूलों की माला अर्पित की। मंदिर के महंत ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप चांदी की प्रतिमा, प्रसाद और चुनरी भेंट की।

मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम और स्वागत
प्रधानमंत्री का मंदिर आगमन पूर्व निर्धारित समय से कुछ देर बाद हुआ। तय कार्यक्रम के अनुसार उनका आगमन सुबह होना था, लेकिन उनका काफिला दोपहर के आसपास मंदिर पहुंचा। वहां मंदिर से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया और उन्हें मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। पूजा की विधि आचार्यों द्वारा पूरी कराई गई, जिसमें प्रधानमंत्री ने देश की उन्नति और विश्व शांति की कामना की।
महंत से मुलाकात और आध्यात्मिक अनुभव
पूजा के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर के महंत और उनके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने महंत का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी जताई। बताया गया कि प्रधानमंत्री करीब 25 मिनट तक मंदिर परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। मंदिर में मौजूद छात्रों द्वारा प्रस्तुत संस्कृत श्लोक भी उन्होंने ध्यान से सुने।
ऐतिहासिक रूप से खास है यह मंदिर
डाट काली मंदिर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास स्थित है और इसे क्षेत्र की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां दर्शन करने से यात्राएं सुरक्षित रहती हैं। लंबे समय से यहां अखंड ज्योति जल रही है, जिसे श्रद्धालु विशेष महत्व देते हैं।
स्थापना से जुड़ी मान्यताएं
मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक ऐतिहासिक कथा भी प्रचलित है। बताया जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में सड़क निर्माण के दौरान यहां काम बार-बार रुक रहा था। बाद में एक स्वप्न के आधार पर यहां देवी के पिंडी स्वरूप की स्थापना की गई, जिसके बाद निर्माण कार्य बिना बाधा पूरा हुआ। तब से यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
दौरे के राजनीतिक मायने भी
प्रधानमंत्री के इस दौरे को केवल धार्मिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक संकेत भी समझे जा रहे हैं। मां काली की पूजा के जरिए पूर्वी भारत, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश मानी जा रही है। साथ ही, स्थानीय भाषा में अभिवादन कर उन्होंने विभिन्न समुदायों तक पहुंच बनाने का संदेश दिया।
महिलाओं और संस्कृति से जुड़ा संदेश
इस दौरे को नारी शक्ति और सांस्कृतिक प्रतीकों से भी जोड़ा जा रहा है। देवी काली की पूजा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देने की बात कही जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह कदम आगामी घटनाक्रमों और चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



