HighCourtAction – बोकारो केस में पुलिस लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त
HighCourtAction – झारखंड के बोकारो जिले में एक युवती के लापता होने और बाद में जंगल से महिला का कंकाल मिलने के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के डीजीपी, बोकारो एसपी, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक और विशेष जांच टीम के अधिकारियों को समन जारी कर 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मां की याचिका पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
यह मामला तब अदालत पहुंचा जब लापता युवती की मां रेखा देवी ने न्याय की गुहार लगाई। उनकी 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 से लापता है। घटना के तुरंत बाद पिंड्राजोरा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन परिवार का आरोप है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लंबी अवधि तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण परिजन अदालत की शरण में पहुंचे।
कंकाल मिलने के बाद भी जांच पर उठे सवाल
हाल ही में बोकारो पुलिस ने जंगल क्षेत्र से एक महिला का कंकाल बरामद किया और आशंका जताई कि यह लापता युवती का हो सकता है। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष के वकील ने इस दावे को चुनौती देते हुए अदालत में कहा कि बरामद अवशेषों की पहचान अभी तक वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं की गई है। इस दावे के बाद जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
डीएनए परीक्षण न होने पर अदालत की नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या बरामद कंकाल का डीएनए परीक्षण पीड़िता के माता-पिता से कराया गया है। जब इसका जवाब नकारात्मक मिला, तो अदालत ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कंकाल कई दिन पहले ही मिल चुका था, तब भी डीएनए जांच न कराना जांच एजेंसियों की गंभीर चूक को दर्शाता है।
जांच में देरी पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में दिनेश महतो नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद जांच की गति धीमी बनी हुई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि समय पर सैंपल एकत्र कर लिए जाते, तो कुछ ही घंटों में सच्चाई सामने आ सकती थी। न्यायाधीशों ने यह भी संकेत दिया कि पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है, जो न्याय के हित में नहीं है।
पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो एसपी ने भी आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में पिंड्राजोरा थाना प्रभारी सहित कुल 18 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन भी अब मामले को लेकर दबाव में है और जवाबदेही तय करने की कोशिश की जा रही है।
परिवार को अब भी न्याय का इंतजार
करीब नौ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद लापता युवती का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। परिवार अब भी अपनी बेटी के बारे में स्पष्ट जानकारी का इंतजार कर रहा है। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। फिलहाल, 16 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



