BaglamukhiJayanti – 24 अप्रैल को मां बगलामुखी जयंती, जानें प्रमुख मंदिर
BaglamukhiJayanti -वैशाख मास के दौरान आने वाले प्रमुख धार्मिक पर्वों में बगलामुखी जयंती का विशेष स्थान माना जाता है। यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इस बार यह 24 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं और उन्हें शक्ति और संरक्षण की देवी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर और विशेष पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई उपासना से जीवन की बाधाएं कम हो सकती हैं।

मां बगलामुखी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में मां बगलामुखी को अत्यंत प्रभावशाली देवी माना गया है, जिन्हें दस महाविद्याओं में आठवां स्थान प्राप्त है। उनकी उपासना विशेष रूप से शत्रुओं से रक्षा और संकटों से मुक्ति के लिए की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन की गई पूजा व्यक्ति को मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास प्रदान करती है। इसी वजह से देशभर के मंदिरों में इस अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर की मान्यता
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में लखुंदर नदी के किनारे स्थित नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है और कहा जाता है कि पांडवों ने यहां विजय की कामना से साधना की थी। इस मंदिर में पूजा के दौरान पीले रंग की सामग्री, खासकर हल्दी, का विशेष महत्व है। माना जाता है कि माता का प्राकट्य हल्दी से जुड़ा है, इसलिए उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।
दतिया का पीताम्बरा पीठ और उसकी विशेषता
मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ भी मां बगलामुखी के प्रमुख धामों में शामिल है। इस स्थान को शत्रु नाश और शक्ति साधना के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां मां की पूजा बगलामुखी स्वरूप में की जाती है और साथ ही खंडेश्वर महादेव तथा धूमावती देवी के दर्शन भी होते हैं। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 20वीं सदी में एक संत और स्थानीय शासक के सहयोग से कराया गया था। आज भी यह स्थान देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कांगड़ा स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां बगलामुखी का मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं। खासतौर पर न्यायालय से जुड़े मामलों में राहत की कामना लेकर भी श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर के पास स्थित प्राचीन शिवलिंग भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र है, जहां दर्शन के बाद जलाभिषेक किया जाता है।
आस्था और परंपरा का संगम
बगलामुखी जयंती के अवसर पर देशभर के इन प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। श्रद्धालु इस दिन माता की आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और स्थिरता की कामना करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं किया जाता। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।



