EconomicOutlook – IMF अनुमान में भारत छठे स्थान पर, ब्रिटेन आगे
EconomicOutlook – अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है। नए अनुमानों के मुताबिक, भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में छठे स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले भारत पांचवें स्थान पर था, लेकिन अब ब्रिटेन ने एक बार फिर उससे आगे निकलकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। हालांकि, इस बदलाव के बावजूद भारत की विकास गति पर कोई खास असर नहीं पड़ा है और वह अभी भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है।

रैंकिंग में बदलाव की क्या है वजह
IMF के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.76 ट्रिलियन डॉलर थी, जो ब्रिटेन से थोड़ी ज्यादा थी। इसी कारण भारत उस समय पांचवें स्थान पर था। लेकिन 2025 में तस्वीर बदल गई। भारत की GDP बढ़कर लगभग 3.92 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची, वहीं ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था करीब 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इस अंतर ने भारत को एक पायदान नीचे ला दिया।
2026 के अनुमान के मुताबिक, वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका पहले, चीन दूसरे, जर्मनी तीसरे, जापान चौथे, ब्रिटेन पांचवें और भारत छठे स्थान पर है। यह बदलाव मुख्य रूप से डॉलर में की गई गणना के कारण सामने आया है।
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर
भारत की रैंकिंग में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण रुपये का कमजोर होना माना जा रहा है। जब किसी देश की अर्थव्यवस्था को डॉलर में मापा जाता है, तो उसकी स्थानीय मुद्रा की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
IMF के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में एक डॉलर की कीमत लगभग 84.57 रुपये थी। 2025 में यह बढ़कर 88.48 रुपये हो गई और 2026 में इसके 92.59 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब है कि रुपये की वैल्यू लगातार गिर रही है, जिससे डॉलर में भारत की GDP कम दिखाई देती है।
इसके विपरीत, ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था डॉलर के लिहाज से मजबूत नजर आई।
आधार वर्ष में बदलाव का भी पड़ा प्रभाव
एक अन्य कारण GDP की गणना में इस्तेमाल किए जाने वाले बेस ईयर में बदलाव भी है। इससे आंकड़ों की तुलना पर असर पड़ता है और कभी-कभी वास्तविक विकास के बावजूद रैंकिंग में उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलाव तकनीकी होते हैं और इनका सीधा मतलब यह नहीं होता कि अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है।
घरेलू स्तर पर विकास की रफ्तार कायम
अगर भारत की अर्थव्यवस्था को रुपये के आधार पर देखा जाए, तो तस्वीर काफी सकारात्मक है। 2024 में देश की GDP करीब 318 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 347 लाख करोड़ रुपये हो गई। इस साल इसके 385 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
इससे साफ है कि देश के भीतर आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और विकास दर में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। यानी अंतरराष्ट्रीय तुलना में भले ही भारत एक स्थान नीचे आया हो, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी हुई है।
आगे की राह और संभावनाएं
भारत को लेकर पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि वह जल्द ही जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। हालांकि, रुपये की कमजोरी के चलते यह लक्ष्य थोड़ा आगे खिसकता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत की रैंकिंग काफी हद तक मुद्रा विनिमय दर पर निर्भर करेगी। अगर रुपया स्थिर रहता है या मजबूत होता है, तो भारत फिर से ऊपर आ सकता है।
IMF ने भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर के अनुमान को सकारात्मक बनाए रखा है। 2027 तक 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है, जबकि घरेलू आकलनों में 2026 के लिए यह 7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है।
लंबी अवधि में तस्वीर सकारात्मक
हाल के वर्षों में भारत की औसत विकास दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे बेहतर रही है। 2021 से 2025 के बीच भारत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत से अधिक रही है, जो इसकी आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत फिर से अपनी स्थिति मजबूत करेगा और धीरे-धीरे शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि रैंकिंग में बदलाव के बावजूद भारत की विकास यात्रा जारी है।



