झारखण्ड

MiningRule – झारखंड हाईकोर्ट ने जंगलों के पास 500 मीटर तय की खनन दूरी

MiningRule – झारखंड में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अहम न्यायिक हस्तक्षेप सामने आया है। राज्य के संरक्षित जंगलों के आसपास पत्थर खनन और क्रशर इकाइयों की स्थापना के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए हाईकोर्ट ने न्यूनतम दूरी को 250 मीटर से बढ़ाकर 500 मीटर कर दिया है। यह निर्देश गुरुवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अगली सुनवाई, जो 18 जून 2026 को निर्धारित है, तक प्रभावी रहेगी।

jharkhand mining distance 500m rule

पुराने नियमों को अदालत ने ठहराया अनुचित

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2015 और 2017 में जारी उन अधिसूचनाओं पर सवाल उठाया, जिनमें खनन गतिविधियों के लिए जंगलों से न्यूनतम दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निर्णय ठोस और प्रासंगिक आधारों पर नहीं लिया गया था। इसके बाद कोर्ट ने इन अधिसूचनाओं को निरस्त करते हुए पहले लागू 500 मीटर की सीमा को बहाल कर दिया।

एक किलोमीटर प्रतिबंध पर भी स्पष्टता

इस मामले में अदालत ने अपने पूर्व आदेश, दिनांक 16 जनवरी 2026, पर भी स्थिति स्पष्ट की। उस आदेश में संरक्षित जंगलों से एक किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। अब कोर्ट ने माना कि वह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की गलत व्याख्या पर आधारित था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में एक किलोमीटर का ईको-सेंसिटिव जोन केवल राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए लागू बताया है, न कि सामान्य संरक्षित जंगलों के लिए।

जनहित याचिका से उठा मुद्दा

यह मामला एक जनहित याचिका के जरिए अदालत के समक्ष आया था, जिसे पूर्व वन अधिकारी आनंद कुमार ने दायर किया था। याचिका में कहा गया था कि 250 मीटर की दूरी पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अपर्याप्त है और इससे जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अदालत ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद नया निर्देश जारी किया।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 2015 में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया। अदालत के अनुसार, इस समिति में वन और पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों की पर्याप्त भागीदारी नहीं थी और इसमें अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा समिति ने झारखंड के स्थानीय जंगलों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किए बिना अन्य राज्यों जैसे बिहार, ओडिशा और पंजाब के मानकों के आधार पर दूरी घटाने की सिफारिश कर दी थी, जिसे कोर्ट ने उचित नहीं माना।

पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता

हाईकोर्ट के इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जंगलों के आसपास खनन गतिविधियों के दायरे को सीमित करने से जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह निर्णय भविष्य में खनन नीतियों को लेकर भी एक स्पष्ट दिशा तय कर सकता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.