RahulGandhiInjury – संसद में भाषण के दौरान हाथ पर पट्टी ने खींचा ध्यान
RahulGandhiInjury – लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान उस समय एक अलग ही जिज्ञासा देखने को मिली, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने भाषण के लिए खड़े हुए। उनके दाहिने हाथ पर बंधी सफेद पट्टी ने सदन के भीतर मौजूद सांसदों से लेकर बाहर आम लोगों तक का ध्यान खींच लिया। यह सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर उन्हें यह चोट कैसे लगी। यहां तक कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी बीच चर्चा में इस पर सवाल कर लिया, जिससे उत्सुकता और बढ़ गई।

जू-जित्सु अभ्यास के दौरान लगी चोट की जानकारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी को यह चोट किसी राजनीतिक गतिविधि के दौरान नहीं बल्कि जू-जित्सु के अभ्यास के समय लगी है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी बताती है कि वह नियमित रूप से इस जापानी मार्शल आर्ट का अभ्यास करते हैं। जू-जित्सु केवल एक खेल के रूप में ही नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और मानसिक संतुलन के तौर पर भी जाना जाता है, और राहुल गांधी इसे अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने पहले भी कई बार अपने सार्वजनिक भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट में इस खेल का उल्लेख किया है।
महिला आरक्षण विधेयक पर स्पष्ट रुख
संसद में जारी चर्चा के बीच राहुल गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष भी साफ किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष महिलाओं को विधायिका में आरक्षण दिए जाने के समर्थन में है। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के जरिए देश के चुनावी ढांचे में बदलाव करना चाहती है, जो विपक्ष को स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, इसी कारण इस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया गया।
सरकार से तत्काल लागू करने की मांग
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से सीधे अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा स्वरूप में लागू करने का प्रस्ताव लाती है, तो विपक्ष उसका पूरा समर्थन करेगा। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
विपक्ष की आपत्ति का कारण
राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष का विरोध महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस प्रक्रिया को लेकर है जिसके तहत सरकार इसे लागू करना चाहती है। उनका आरोप था कि आरक्षण के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की योजना को जोड़कर सरकार व्यापक बदलाव की कोशिश कर रही है। इस पहलू को लेकर विपक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।