GoldPriceToday – सोने-चांदी में हुई गिरावट, डॉलर मजबूत होने का दिखा असर
GoldPriceToday – मंगलवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती का असर साफ नजर आया। इसी कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है और बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।

एमसीएक्स पर सुबह करीब 9 बजे सोना मामूली गिरावट के साथ लगभग 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी में अपेक्षाकृत ज्यादा कमजोरी रही और इसकी कीमत करीब 2,50,800 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसल गई। दोनों धातुओं में यह गिरावट निवेशकों के रुख में बदलाव का संकेत दे रही है।
डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में हालिया कमजोरी की एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग पर असर पड़ता है। इसी के चलते निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
इसके साथ ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी डॉलर को सहारा दिया है। चूंकि वैश्विक स्तर पर तेल का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर की मांग भी बढ़ती है और इसका सीधा असर सोने पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिकी नजर
मध्य पूर्व से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा या स्थिति और जटिल बनेगी।
सूत्रों के मुताबिक, आगामी दौर की बातचीत को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अगर कोई सकारात्मक संकेत मिलता है, तो इससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आ सकती है, जिसका असर सोने की कीमतों पर भी दिखेगा।
कच्चे तेल और शेयर बाजार का प्रभाव
हाल के दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर भी कीमती धातुओं पर पड़ा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने महंगाई के दबाव को बढ़ाया है। ऐसे में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं रह जाता, जो सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है।
दरअसल, सोना ऐसा निवेश है जिस पर ब्याज नहीं मिलता, इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
लंबी अवधि में संभावनाएं बरकरार
हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना लंबे समय में अपनी अहमियत बनाए रखेगा। आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक जोखिमों के दौर में इसे सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है और बाजार स्थिर होने पर सोने की कीमतों में फिर मजबूती आ सकती है।
फेडरल रिजर्व के फैसलों पर फोकस
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक से जुड़े संकेतों पर भी है। यदि भविष्य में ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो सोने को समर्थन मिल सकता है। वहीं, अगर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त नीति जारी रहती है, तो इससे सोने पर दबाव बना रह सकता है।
वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखी गई, जो संकेत देती है कि निवेशक अभी भी सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं।