JaspritBumrah – WTC जीत की तैयारी में ये चाल चल रही है पूरी टीम
JaspritBumrah – भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह सिर्फ उनकी गेंदबाजी नहीं, बल्कि उन्हें लेकर बनाई जा रही लंबी रणनीति है। अपनी सटीक लाइन-लेंथ और किफायती स्पेल के लिए पहचाने जाने वाले बुमराह को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अब ज्यादा सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ता दिख रहा है। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट को ध्यान में रखते हुए उनके उपयोग और फिटनेस पर फोकस बढ़ाया गया है।

टेस्ट क्रिकेट पर फोकस बढ़ाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड की कोशिश है कि मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में बुमराह अधिक से अधिक मुकाबलों में उपलब्ध रहें। भारत को इस दौरान कुल नौ टेस्ट मैच खेलने हैं और टीम प्रबंधन चाहता है कि इस अहम दौर में उनका प्रमुख गेंदबाज लगातार टीम के साथ रहे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब टीम इंडिया की नजर टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी ट्रॉफी पर टिकी है, जो अब तक सिर्फ एक बार ही हासिल हो सकी है।
सीमित ओवरों में आराम देने की संभावना
बुमराह के वर्कलोड को संतुलित रखने के लिए चयनकर्ता कुछ वनडे मुकाबलों में उन्हें आराम देने पर भी विचार कर रहे हैं। उनकी गेंदबाजी शैली और एक्शन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिसे देखते हुए यह रणनीति अपनाई जा रही है। टीम प्रबंधन का मानना है कि अगर उन्हें सीमित ओवरों के कुछ मैचों से दूर रखा जाए, तो वह टेस्ट सीरीज में पूरी ऊर्जा के साथ उतर सकते हैं।
आने वाले मैचों का व्यस्त कार्यक्रम
आईपीएल के बाद भारतीय टीम जून में अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट खेलेगी, हालांकि यह मुकाबला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं होगा। इसके बाद भारत को श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो-दो टेस्ट मैच खेलने हैं। वहीं अगले साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया भारत दौरे पर आएगी, जहां पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेली जाएगी। इस लंबे और चुनौतीपूर्ण शेड्यूल में बुमराह की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
रैंकिंग में सुधार की चुनौती
फिलहाल भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में निचले पायदान पर है। ऐसे में आने वाले मैचों में लगातार अच्छे प्रदर्शन की जरूरत है। टीम प्रबंधन का मानना है कि अगर बुमराह पूरी तरह फिट रहते हैं और हर मैच में योगदान देते हैं, तो टीम की स्थिति में सुधार हो सकता है। उनकी मौजूदगी गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती देती है और विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाती है।
पहले भी अपनाई गई थी सावधानी
वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर बुमराह के साथ पहले भी सावधानी बरती गई है। इंग्लैंड दौरे पर पिछले साल पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्होंने सिर्फ तीन मुकाबले ही खेले थे। उस समय भी यह तय किया गया था कि उन्हें सीमित मैचों में ही उतारा जाएगा ताकि चोट का खतरा कम रहे। हालांकि अब परिस्थितियां अलग हैं और टीम को उनकी ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है।
संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती
बुमराह जैसे अहम खिलाड़ी के साथ सबसे बड़ी चुनौती यही है कि उन्हें ज्यादा खेलने दिया जाए या उनकी फिटनेस को प्राथमिकता दी जाए। बोर्ड और टीम मैनेजमेंट इसी संतुलन को साधने की कोशिश कर रहे हैं। अगर यह योजना सफल रहती है, तो भारत को टेस्ट क्रिकेट में बड़ा फायदा मिल सकता है।