FuelPrices – वैश्विक तेल उछाल के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल स्थिर
FuelPrices – मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसका असर दुनियाभर के ईंधन बाजार पर साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि कुल मिलाकर कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। इस उछाल के बीच भारत में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी किए हैं, लेकिन यहां कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, जो कई अन्य देशों की तुलना में अलग तस्वीर पेश करती है।

भारत में मौजूदा कीमतें
ताजा अपडेट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए राहत की तरह देखी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब कई देशों में ईंधन महंगा हो चुका है।
पड़ोसी देशों में बढ़ती कीमतें
भारत के आसपास के देशों में पेट्रोल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल 123 रुपये से अधिक में मिल रहा है, जबकि चीन में यह करीब 131 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। श्रीलंका में पेट्रोल की कीमत 134 रुपये से ऊपर है। वहीं नेपाल और भूटान जैसे देशों में भी ईंधन के दाम 100 रुपये से काफी ऊपर बने हुए हैं। म्यांमार में तो पेट्रोल की कीमत लगभग 147 रुपये प्रति लीटर तक दर्ज की गई है, जो क्षेत्र में सबसे अधिक में से एक है।
वैश्विक स्तर पर तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। खासकर एशिया के विकासशील देशों में यह असर ज्यादा दिखाई दिया है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ी हैं, जबकि डीजल में 150 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया है। लाओस, फिलीपींस और मलेशिया में भी डीजल की कीमतों में करीब 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। यहां तक कि न्यूजीलैंड और यूएई जैसे देशों में भी ईंधन महंगा हुआ है।
भारत में कीमतें स्थिर क्यों
वैश्विक स्तर पर कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं। इसके पीछे सरकार और तेल कंपनियों की संतुलित नीति को अहम कारण माना जा रहा है। टैक्स में समायोजन, सब्सिडी और कंपनियों के मार्जिन के जरिए कीमतों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का सीधा असर आम लोगों पर कम पड़े।
आगे क्या रह सकती है स्थिति
सरकार का कहना है कि फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी। अप्रैल 2022 के बाद से पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में बड़े बदलाव नहीं हुए हैं, जबकि इस दौरान वैश्विक बाजार में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। जब कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकारी कंपनियों ने बेहतर मुनाफा कमाया, जिसका उपयोग बाद में बढ़ती कीमतों के प्रभाव को संतुलित करने में किया गया।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में भी धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। हालांकि फिलहाल सरकार महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए कीमतों को स्थिर बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल रही है, लेकिन भविष्य की स्थिति काफी हद तक वैश्विक बाजार के रुझान पर निर्भर करेगी।