OilPrices – कच्चे तेल में तेजी के बीच कंपनियों को घाटा, राहत का प्रस्ताव नहीं…
OilPrices – देश में पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की खुदरा बिक्री करने वाली सरकारी तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का दबाव झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद फिलहाल सरकार की ओर से किसी वित्तीय सहायता का संकेत नहीं मिला है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि तेल विपणन कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के चलते कंपनियों पर लागत का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

शेयर बाजार में तेल कंपनियों पर दबाव
इस स्थिति का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बीपीसीएल के शेयर में गिरावट देखी गई और यह 300 रुपये के आसपास से नीचे आ गया। इसी तरह आईओसी और एचपीसीएल के शेयर भी नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन की अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार का रुख साफ, फिलहाल कोई योजना नहीं
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि तेल कंपनियों को राहत देने के लिए कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के सामने नहीं है। इन कंपनियों ने पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। इससे उनके मार्जिन पर असर पड़ा है और घाटा बढ़ता जा रहा है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी हैं। वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जबकि इससे पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है, जहां उपभोक्ताओं को महंगा ईंधन खरीदना पड़ रहा है।
कंपनियों को प्रति लीटर भारी नुकसान
घरेलू स्तर पर खुदरा कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के कारण तेल कंपनियों को प्रति लीटर 25 से 28 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे उद्योग की भाषा में अंडर-रिकवरी कहा जाता है। इसके अलावा, विमानन ईंधन की बिक्री पर भी कंपनियों को घाटा झेलना पड़ रहा है, क्योंकि घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है। इससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है।
आगे क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं और खुदरा स्तर पर कोई बदलाव नहीं होता, तो तेल कंपनियों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इससे बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है और निवेशकों का रुझान भी प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और कंपनियां इस स्थिति से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाती हैं।