उत्तराखण्ड

FakeCase – चंपावत कथित गैंगरेप मामले में पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

FakeCase – उत्तराखंड के चंपावत जिले में सामने आए कथित गैंगरेप मामले में पुलिस जांच के बाद नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने दावा किया है कि 16 वर्षीय किशोरी के साथ गैंगरेप की घटना वास्तविक नहीं थी, बल्कि इसे आपसी रंजिश के चलते साजिश के तौर पर रचा गया था। इस मामले में पहले भाजपा से जुड़े एक नेता और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब पुलिस जांच और पीड़िता के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम को फर्जी करार दिया गया है।

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मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठी। हालांकि जांच के बाद पुलिस ने कहा कि अब तक मिले साक्ष्य कथित आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं।

पुलिस जांच में सामने आए नए तथ्य

चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने प्रेस वार्ता में बताया कि मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट समेत कई पहलुओं की पड़ताल की गई। जांच में सामने आया कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, वे कथित घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।

पुलिस के अनुसार, पूर्व बीडीसी सदस्य कमल रावत पर इस पूरी साजिश को रचने का संदेह है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी और कुछ लोगों के बीच पहले से विवाद था और उसी रंजिश में यह कहानी तैयार की गई। पुलिस ने बताया कि किशोरी के परिवार को कुछ तरह के आश्वासन और प्रलोभन दिए जाने की भी जानकारी मिली है।

मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता का बयान

जांच के दौरान किशोरी का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने भी बताया कि मेडिकल जांच में दुष्कर्म या किसी प्रकार की गंभीर शारीरिक चोट के प्रमाण नहीं मिले। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी गैंगरेप के दावे से मेल नहीं खाते।

कोर्ट परिसर से हिरासत में लिया गया पूर्व बीडीसी सदस्य

मामले में नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब पुलिस ने पूर्व बीडीसी सदस्य कमल रावत को जिला अदालत परिसर से हिरासत में लिया। इस कार्रवाई का कुछ अधिवक्ताओं ने विरोध किया। उनका कहना था कि अदालत परिसर से इस तरह किसी व्यक्ति को उठाना उचित प्रक्रिया के खिलाफ है।

बार संघ से जुड़े कुछ अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा। बाद में इस मामले को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी पत्र सौंपा गया।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई

मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। पार्टी नेताओं ने विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरा और कहा कि राज्य में अपराध की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

वहीं पुलिस खुलासे के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर बिना जांच राजनीतिक आरोप लगाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि संवेदनशील मामले में तथ्यों के सामने आने से पहले राजनीतिक बयानबाजी करना उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना गलत संदेश देता है।

जांच आगे भी जारी रहेगी

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर भरोसा न करें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें।

इस मामले ने एक बार फिर संवेदनशील घटनाओं में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की आवश्यकता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

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