ClassicSong – जब ‘दिल के झरोखे में’ गाते समय भावुक हुए थे शम्मी कपूर…
ClassicSong – पुराने हिंदी फिल्मी गीतों का आकर्षण आज भी संगीत प्रेमियों के बीच कायम है। कई ऐसे सदाबहार गाने हैं, जिन्हें सुनते ही दर्शक भावुक हो जाते हैं। कुछ गीत सिर्फ दर्शकों के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें फिल्माने वाले कलाकारों के लिए भी बेहद खास रहे हैं। ऐसा ही एक मशहूर गीत था ‘दिल के झरोखे में’, जिसे फिल्माते समय अभिनेता शम्मी कपूर खुद अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए थे।

‘ब्रह्मचारी’ फिल्म का यादगार गीत
साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ का यह गीत हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक और लोकप्रिय गानों में गिना जाता है। मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड किए गए इस गीत को आज भी लोग बेहद पसंद करते हैं। फिल्म में शम्मी कपूर पर फिल्माए गए इस गाने ने उस दौर में दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ था।
गीत की धुन और शब्द इतने भावनात्मक थे कि शूटिंग से पहले ही शम्मी कपूर को यह महसूस होने लगा था कि इसे निभाना उनके लिए आसान नहीं होगा।
गाना सुनकर शूटिंग से किया था इनकार
गीतकार मनोज मुंतशिर ने एक कार्यक्रम के दौरान इस गाने से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया था। उनके अनुसार जब शम्मी कपूर को यह गीत सुनाया गया तो उन्होंने शुरुआत में इसे फिल्माने से मना कर दिया था। सेट पर मौजूद लोग यह समझ बैठे कि शायद अभिनेता को गाना पसंद नहीं आया।
शम्मी कपूर के इस फैसले से शूटिंग यूनिट में चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी असली वजह बताई, जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए।
भावनाओं पर काबू खोने का था डर
दरअसल फिल्म की कहानी के अनुसार इस दृश्य में शम्मी कपूर को रोना नहीं था। लेकिन संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन ने इतना भावुक संगीत तैयार किया था कि अभिनेता को डर था कि वह शूटिंग के दौरान अपने आंसुओं को रोक नहीं पाएंगे।
बताया जाता है कि उन्होंने कहा था कि वह खुद को अच्छी तरह जानते हैं और यह गीत सुनकर भावुक हो जाना स्वाभाविक है। इसी वजह से उन्होंने गीत बदलने तक की बात कही थी। हालांकि बाद में टीम के समझाने पर उन्होंने शूटिंग के लिए हामी भर दी।
शूटिंग के दौरान सच साबित हुआ डर
जब इस गाने की शूटिंग शुरू हुई तो वही हुआ जिसका शम्मी कपूर को अंदेशा था। कैमरे के सामने अभिनय करते हुए उनके लिए खुद को संभालना मुश्किल हो गया। बाद में अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि इस गीत को फिल्माते समय भावनाओं को नियंत्रित करना उनके लिए बेहद कठिन था।
उन्होंने कहा था कि उस पल की भावना को केवल वही समझ सकते हैं, क्योंकि यह गीत दिल को भीतर तक छू लेने वाला था। शायद यही वजह है कि यह गाना आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।
गीतकार और संगीतकारों की भी हुई थी सराहना
‘दिल के झरोखे में’ गीत के बोल मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी ने लिखे थे। वहीं इसका संगीत शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने तैयार किया था। मोहम्मद रफी की आवाज ने इस गीत को और भी खास बना दिया। फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ एक फैमिली ड्रामा थी, जिसका निर्देशन भप्पी सोनी ने किया था।
आज भी यह गीत हिंदी फिल्म संगीत के उन चुनिंदा गानों में शामिल है, जिन्हें समय गुजरने के बाद भी उसी भावनात्मक जुड़ाव के साथ सुना जाता है।