अंतर्राष्ट्रीय

MiddleEastCrisis – अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के नहीं दिखे संकेत

MiddleEastCrisis – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के बावजूद हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर असर डालना शुरू कर दिया है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका से कई देशों में चिंता बढ़ गई है।

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हाल के दिनों में ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया शांति प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इससे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी गहरे हैं और तत्काल समाधान की संभावना कम दिखाई दे रही है।

ईरान ने रखी थीं कई अहम शर्तें

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने प्रस्ताव में क्षेत्रीय संघर्षों को रोकने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया था। खास तौर पर लेबनान में हिंसा कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।

ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि युद्ध और प्रतिबंधों के कारण देश को जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जानी चाहिए। साथ ही अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंध हटाने और ईरानी तेल के निर्यात पर लगी पाबंदियां समाप्त करने की मांग भी की गई।

ईरान ने प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज क्षेत्र में उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जानी चाहिए। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से अस्वीकार्य बताया।

ट्रंप का स्पष्ट रुख

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा प्रस्ताव अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं है। उनके बयान से यह साफ हो गया कि वाशिंगटन फिलहाल ईरान की शर्तों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।

उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी अपने देश का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, न कि किसी दबाव में झुकना। ईरानी मीडिया के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान बाहरी दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

दोनों देशों के बीच जारी संपर्क में पाकिस्तान की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान और वाशिंगटन के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में संकेत दिया कि ईरान की प्रतिक्रिया संबंधित पक्षों तक पहुंचा दी गई है।

हालांकि उन्होंने बातचीत के विवरण सार्वजनिक नहीं किए। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बैक चैनल संवाद अब भी जारी है और दोनों पक्ष पूरी तरह बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं हैं।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। कई देशों ने अपने ऊर्जा आयात को लेकर वैकल्पिक योजनाओं पर भी काम शुरू कर दिया है।

संघर्ष के बाद बनी अस्थिर स्थिति

अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी में ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े थे। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी कार्रवाई की गई, जिसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ गया। हालांकि अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब आने वाले दिनों की बातचीत और फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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