Congress – केरल में मुख्यमंत्री चयन को लेकर मंथन तेज, फैसला आज संभव
Congress – केरल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद भी कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। पार्टी के भीतर जारी चर्चा और अलग-अलग गुटों के बीच बढ़ती सक्रियता के कारण पिछले कई दिनों से स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि बुधवार को लंबे इंतजार के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

लेफ्ट फ्रंट के एक दशक लंबे शासन को समाप्त कर सत्ता में वापसी करने वाले कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने राज्य की राजनीति में मजबूत वापसी दर्ज की है। लेकिन जीत के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई अंदरूनी खींचतान ने पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जीत के बाद सामने आई गुटबाजी
140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत मिला है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पाई। चुनाव प्रचार के दौरान जो मतभेद दबे हुए दिखाई दे रहे थे, वे अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह से दिल्ली और केरल के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैकडोर बातचीत, समर्थकों के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर चल रहे कैंपेन ने पार्टी की जीत की चमक कुछ हद तक कम कर दी है। कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थक खुले तौर पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।
दिल्ली में हुई अहम बैठकें
मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने केरल के प्रमुख नेताओं को दिल्ली बुलाया था। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।
बैठकों से बाहर निकले नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि अब ज्यादा देरी नहीं होगी। पार्टी नेतृत्व ऐसा नाम तय करना चाहता है जो संगठन, विधायकों और गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन बना सके।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन बड़े नाम
फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला शामिल हैं। तीनों नेताओं का संगठन और विधायकों के बीच अलग-अलग स्तर पर प्रभाव माना जाता है।
पार्टी के भीतर समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक गुट का कहना है कि केसी वेणुगोपाल को सबसे ज्यादा समर्थन प्राप्त है, जबकि दूसरी ओर वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थक भी अपनी संख्या मजबूत बता रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व केवल आंकड़ों के आधार पर फैसला लेने के बजाय राजनीतिक संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है।
राहुल गांधी ने मांगा जवाब
मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी और पार्टी के भीतर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राहुल गांधी ने भी नाराजगी जताई है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कुछ नेताओं से इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा है। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि सरकार गठन से पहले ही जनता के बीच नकारात्मक संदेश जाए।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अंतिम फैसला लेते समय केवल विधायकों की राय ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की भावना और गठबंधन सहयोगियों के सुझावों को भी महत्व दिया जाएगा।
भाजपा शासित राज्यों से हो रही तुलना
केरल में मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी की तुलना भाजपा शासित राज्यों से भी की जा रही है। पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के कुछ ही दिनों बाद नई सरकार का गठन कर दिया गया था। असम में भी शपथ ग्रहण और मंत्रिमंडल गठन की प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सरकार गठन के साथ-साथ संगठनात्मक एकता बनाए रखने की भी है। यदि फैसला जल्द नहीं हुआ तो इसका असर जनता के भरोसे और पार्टी की छवि पर पड़ सकता है।