बिहार

Governance – बिहार में ईंधन आपूर्ति और स्कूल फीस पर सख्त हुई सरकार

Governance – बिहार सरकार ने राज्य में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में साफ किया कि राज्य में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार करें और वैकल्पिक ऊर्जा साधनों को अपनाने पर ध्यान दें।

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मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात भी कही। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहरों की कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाए। सरकार का कहना है कि आम लोगों को सुविधाजनक और सुरक्षित ऊर्जा विकल्प उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।

पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर

लोक सेवक आवास में आयोजित बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य में ईंधन की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी दी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बिहार में फिलहाल एक लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हैं और हजारों नए आवेदन लंबित हैं। सरकार का लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइप गैस सुविधा पहुंचाना है।

बैठक में मौजूद अधिकारियों और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सकेगी। समीक्षा बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा तेल कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था पर फैसला

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अहम मुद्दे पर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर नियंत्रण लगाया जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि स्कूल अब पुनर्नामांकन शुल्क या अन्य अनावश्यक शुल्क अभिभावकों से नहीं वसूल सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से निजी विद्यालयों को सभी शुल्कों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा और स्कूलों की शुल्क प्रणाली अधिक व्यवस्थित बनेगी।

किताब और यूनिफॉर्म खरीदने की स्वतंत्रता

सरकार ने अभिभावकों को एक और बड़ी राहत देने की बात कही है। नए निर्देशों के अनुसार, निजी स्कूल अब छात्रों के अभिभावकों को किसी खास दुकान या ब्रांड से किताबें, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी विक्रेता से आवश्यक सामग्री खरीद सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई अभिभावकों से इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं कि स्कूल सीमित दुकानों से महंगे दाम पर सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं। सरकार अब ऐसी व्यवस्था को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है ताकि शिक्षा से जुड़ा खर्च संतुलित किया जा सके।

आम लोगों को राहत देने पर फोकस

सरकार का कहना है कि ईंधन आपूर्ति से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक, दोनों क्षेत्रों में आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी फैसलों का प्रभाव सीधे लोगों तक पहुंचे और व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।

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