NEET – पेपर लीक जांच में जयपुर और गुरुग्राम से पांच गिरफ्तार
NEET – नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के रहने वाले लोग शामिल हैं। मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी के पास है, जो संभावित नेटवर्क और पेपर के प्रसार की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हुई है।

गिरफ्तार किए गए लोगों में जयपुर जिले के जमवा-रामगढ़ क्षेत्र से दिनेश बीवाल, उनके भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल के बेटे विकास बीवाल शामिल हैं। इनके अलावा गुरुग्राम निवासी यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार को भी हिरासत में लिया गया है। स्थानीय अदालत में पेशी के बाद चार आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया।
जांच में सामने आए नए संकेत
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विकास बीवाल ने पिछले वर्ष भी नीट परीक्षा दी थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। अधिकारियों को संदेह है कि इसी वजह से इस बार कथित रूप से अवैध तरीके से प्रश्नपत्र हासिल करने की कोशिश की गई।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ तेजी से साझा किया जा रहा था। व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स में वायरल इस सामग्री ने जांचकर्ताओं का ध्यान खींचा।
परिवार और संपर्कों की हो रही जांच
अधिकारियों के मुताबिक, बीवाल परिवार पहले से जांच के दायरे में इसलिए भी आया क्योंकि परिवार के कई सदस्य मेडिकल शिक्षा से जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि परिवार के चार बच्चे पहले ही मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं एक नाबालिग सदस्य आगामी परीक्षा की तैयारी के लिए सीकर में कोचिंग कर रहा था।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कथित तौर पर प्रश्नपत्र से जुड़ी सामग्री कुछ लोगों तक पहुंचाई गई। इसके बाद यह सीमित दायरे से निकलकर अन्य छात्रों तक भी फैल सकती है। अधिकारियों का मानना है कि सीकर के कोचिंग नेटवर्क के जरिए यह सामग्री बड़े स्तर पर प्रसारित हुई होगी।
एक ईमेल से खुला मामला
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सीकर के एक कोचिंग संस्थान से जुड़े शिक्षक ने सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नों और वास्तविक परीक्षा में पूछे गए सवालों के बीच समानता देखी। इसके बाद उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को ईमेल भेजकर मामले की जानकारी दी।
यह सूचना बाद में जांच एजेंसियों तक पहुंची, जिसके बाद सीकर में गुप्त रूप से पूछताछ शुरू की गई। शुरुआती जांच के दौरान कुछ संदिग्ध नाम सामने आए और एक कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। इसी कड़ी में आगे की कार्रवाई करते हुए अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में राज्य स्तर पर कार्रवाई की गति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर ही जांच एजेंसियों को वायरल कंटेंट और असली प्रश्नपत्र के बीच समानताएं दिखाई देने लगी थीं। इसके बावजूद तत्काल सार्वजनिक चेतावनी या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई।
अब केंद्रीय जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र तक पहुंच कैसे बनी, किन माध्यमों से उसे साझा किया गया और इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे। डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई जरूरी मानी जा रही है ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।