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WaterSharing – पद्मा नदी पर नया बांध बनाएगा बांग्लादेश

WaterSharing – बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर बड़े बांध निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी है। ढाका का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य देश के भीतर जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी 1996 की संधि की अवधि समाप्त होने के करीब पहुंच रही है।

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सरकारी अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का पूरा खर्च बांग्लादेश स्वयं उठाएगा और इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य 2033 तक पूरा हो सकता है। इस परियोजना का लाभ राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के कई जिलों को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

परियोजना पर हजारों करोड़ टका खर्च

राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति ने परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बताया कि इसकी अनुमानित लागत लगभग 34 हजार करोड़ टका तय की गई है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि यह परियोजना देश की जल सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम होगी।

जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, बांध के जरिए अतिरिक्त पानी को संग्रहित करने और जरूरत के समय उपयोग करने की योजना बनाई गई है। इससे सूखे के मौसम में जल संकट को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत से बातचीत की जरूरत नहीं: बांग्लादेश

बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित से जुड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांध निर्माण को लेकर भारत से अलग से चर्चा की आवश्यकता नहीं समझी जा रही है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गंगा जल बंटवारे और साझा नदियों से जुड़े व्यापक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी। मंत्री के अनुसार, क्षेत्रीय जल प्रबंधन जैसे विषयों पर संवाद आवश्यक है और दोनों देश इस दिशा में संपर्क बनाए हुए हैं।

फरक्का बैराज क्यों बना अहम मुद्दा

भारत ने वर्ष 1975 में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण किया था। इसका उद्देश्य हुगली नदी में जल प्रवाह बढ़ाकर कोलकाता बंदरगाह को सक्रिय बनाए रखना था। भारत का पक्ष रहा है कि यह परियोजना मुख्य रूप से बंदरगाह और नदी मार्ग को संरक्षित करने के लिए बनाई गई थी।

समय के साथ गंगा जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं। वर्ष 1996 में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसके तहत नदी के पानी के उपयोग को लेकर व्यवस्था तय की गई थी।

बांग्लादेश की पुरानी चिंताएं

बांग्लादेश लंबे समय से यह कहता रहा है कि सूखे के दौरान पानी की उपलब्धता कम होने से उसके कई क्षेत्रों में खेती और नदी तंत्र प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल प्रवाह घटने से कुछ इलाकों में खारे पानी की समस्या भी बढ़ी है, जिससे कृषि भूमि पर असर पड़ता है।

इसी पृष्ठभूमि में पद्मा नदी पर नया बांध बांग्लादेश की दीर्घकालिक जल नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि परियोजना से जल संरक्षण, सिंचाई और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

क्षेत्रीय संबंधों पर भी नजर

विश्लेषकों का मानना है कि यह परियोजना केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में नदी आधारित कूटनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में गंगा जल समझौते को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत अहम मानी जा रही है।

दोनों देशों के बीच साझा नदियों का मुद्दा लंबे समय से सहयोग और संवेदनशीलता दोनों का विषय रहा है। ऐसे में नई परियोजना पर क्षेत्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।

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