बिज़नेस

FuelRates – पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में अब भी सस्ता पेट्रोल

FuelRates – अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बीते कुछ दिनों के दौरान लगातार बढ़ोतरी हुई है। देशभर में पांच दिनों के भीतर ईंधन के दाम करीब चार रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। हालांकि वैश्विक तुलना में देखा जाए तो भारत में पेट्रोल की कीमतें अब भी कई पड़ोसी और विकसित देशों से कम हैं।

india petrol cheaper than neighbour countries

तेल बाजार में बढ़ती हलचल के बीच आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन पड़ोसी देशों के मुकाबले भारतीय उपभोक्ताओं पर फिलहाल अपेक्षाकृत कम बोझ पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती लागत का असर आने वाले दिनों में और देखने को मिल सकता है।

उपमहाद्वीप के देशों में भारत अब भी राहत की स्थिति में

भारत में फिलहाल पेट्रोल की औसत कीमत करीब 101 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है। यदि इसकी तुलना आसपास के देशों से करें तो पाकिस्तान में पेट्रोल करीब 142 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यानी वहां भारतीय कीमतों से लगभग 41 रुपये अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

श्रीलंका में भी ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वहां पेट्रोल करीब 140 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। नेपाल में भी स्थिति अलग नहीं है, जहां पेट्रोल की कीमत लगभग 136 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। चीन में भी पेट्रोल भारतीय बाजार की तुलना में काफी महंगा बना हुआ है और वहां कीमतें 130 रुपये प्रति लीटर से ऊपर हैं।

बांग्लादेश और म्यांमार में भी ईंधन की कीमतें भारतीय दरों से अधिक बनी हुई हैं। खासतौर पर म्यांमार में पेट्रोल करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

अमेरिका और यूरोप में भी बढ़ा दबाव

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट का असर अमेरिका समेत कई बड़े देशों में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में हाल के दिनों में करीब 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 121 रुपये तक पहुंच गई है।

यूरोप के कई देशों में हालात और अधिक महंगे हैं। इजरायल, डेनमार्क, नीदरलैंड, फिनलैंड और ग्रीस जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें 230 रुपये से लेकर 270 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई हैं। हांगकांग दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला क्षेत्र बना हुआ है, जहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये तक पहुंच चुकी है।

तेल संकट के पीछे वैश्विक तनाव बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। कच्चे तेल की कीमतें पहले जहां 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, वहीं अब यह बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।

तेल कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक सरकारी तेल विपणन कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। लंबे समय तक घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखने के बाद अब कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाने शुरू किए हैं।

चुनाव के बाद तेज हुई कीमतों में बढ़ोतरी

राजनीतिक हलकों में पहले से ही यह चर्चा थी कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में संशोधन किया जा सकता है। अब लगातार हो रही बढ़ोतरी ने उन अटकलों को सही साबित कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में दूसरी बार कीमतों में इजाफा किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में भी और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर सरकार और तेल कंपनियों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.