AIMSGorakhpur – मरीज की मौत के बाद ICU में हंगामा, सुरक्षा पर उठे सवाल
AIMSGorakhpur – गोरखपुर स्थित एम्स में मंगलवार सुबह एक मरीज की मौत के बाद सर्जिकल आईसीयू में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घटना के दौरान तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में धक्का-मुक्की और तोड़फोड़ तक पहुंच गई। इस दौरान वार्ड का कांच का दरवाजा भी टूट गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच की बताई जा रही है। सूचना मिलने के बाद अस्पताल के सुरक्षा कर्मी और पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में शव को आईसीयू से हटाकर मोर्चरी में रखवाया गया। देर शाम अस्पताल प्रशासन ने मामले में पुलिस को तहरीर सौंप दी, हालांकि समाचार लिखे जाने तक औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था।
गंभीर बीमारी से जूझ रहा था मरीज
जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान कुशीनगर निवासी 45 वर्षीय रवि यादव के रूप में हुई है। वह लंबे समय से अल्कोहलिक पैंक्रियाटाइटिस और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। दोनों किडनी खराब होने के कारण वह नियमित डायलिसिस पर था और एम्स के सर्जिकल आईसीयू में भर्ती था।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद कुछ परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर नाराजगी जताई और आईसीयू परिसर में विरोध शुरू कर दिया।
महिला कर्मचारी और नर्सिंग स्टाफ से विवाद
एम्स प्रशासन के अनुसार, हंगामे के दौरान एक महिला सफाईकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग ऑफिसर ने जब स्थिति संभालने की कोशिश की, तब उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है।
बताया जा रहा है कि बाद में मृतक के कुछ अन्य परिजन भी अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान आईसीयू के प्रवेश द्वार का कांच टूट गया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी।
इलाज में लापरवाही का आरोप
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि मरीज को समय पर ऑक्सीजन और आवश्यक उपचार नहीं मिला। पुलिस ने मामले को देखते हुए पोस्टमार्टम कराने का सुझाव दिया था।
शुरुआत में परिवार इसके लिए तैयार हो गया था, लेकिन बाद में उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने दी शिकायत
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि मरीज की स्थिति पहले से ही बेहद गंभीर थी और डॉक्टर लगातार इलाज कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अस्पताल कर्मियों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज भी देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
घटना के बाद अस्पताल परिसर के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए गए। इनमें टूटे कांच और अस्पताल के भीतर शोर-शराबे जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। सर्जिकल आईसीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्र में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और एक से अधिक तीमारदारों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हो रही है। फिलहाल पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं।