TMCrisis – फालता विवाद के बाद पार्टी बैठक में उठे कई सवाल
TMCrisis – पश्चिम बंगाल की राजनीति में फालता विधानसभा सीट को लेकर नया विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस की हालिया आंतरिक बैठक में पार्टी के कई विधायकों ने संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठाए। चर्चा का केंद्र फालता सीट से उम्मीदवार रहे जहांगीर खान का अचानक चुनाव से हटना रहा, जिसने पार्टी के भीतर असहमति को खुलकर सामने ला दिया।

कालीघाट में आयोजित इस बैठक में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, कई विधायकों ने फालता सीट पर हुए घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और संगठन के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया पर चर्चा की।
जहांगीर खान के फैसले से बढ़ी हलचल
फालता सीट पर दोबारा मतदान से ठीक पहले जहांगीर खान द्वारा चुनाव मैदान छोड़ने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से उस सीट पर मुकाबले का समीकरण बदल सकता है।
बैठक में कुछ विधायकों ने सवाल उठाया कि उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बावजूद पार्टी की ओर से अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
नेतृत्व शैली पर भी उठे सवाल
बैठक में की गई कुछ टिप्पणियों को अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना गया। फालता विधानसभा क्षेत्र, डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसे अभिषेक बनर्जी का प्रभाव वाला इलाका माना जाता है।
कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह भी पूछा कि संगठन के भीतर मजबूत समर्थन रखने वाले नेता ने अचानक चुनाव से पीछे हटने का फैसला क्यों लिया। पार्टी के अंदर इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
पुराने बयान भी चर्चा में आए
फालता सीट को लेकर प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी की एक टिप्पणी भी बैठक में चर्चा का विषय बनी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इलाके में श्मशान घाट निर्माण की बात कही थी, जिसे लेकर अब पार्टी के भीतर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विधायकों ने बैठक में व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि अब उस प्रस्तावित परियोजना का क्या होगा। हालांकि बैठक के बाद पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
चुनाव के बाद बदली राजनीतिक सक्रियता
राज्य में चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। वहीं अभिषेक बनर्जी की सीमित राजनीतिक मौजूदगी को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फालता सीट का विवाद केवल स्थानीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि हालिया बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में कई विधायक रहे अनुपस्थित
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में करीब 15 विधायक शामिल नहीं हुए। कुछ नेताओं ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, जबकि कुछ अन्य की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
इसी बैठक में विधानसभा में विपक्ष के नेता को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में हस्ताक्षर किए, जिससे विपक्ष की रणनीति को लेकर भी संकेत मिले हैं।
नगर निगम नोटिस पर अभिषेक का जवाब
बैठक से पहले कोलकाता नगर निगम की ओर से अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुछ संपत्तियों को लेकर नोटिस जारी किया गया था। इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त प्रतिक्रिया दी और कहा कि राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक कार्रवाई से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, अभिषेक ने साफ कहा कि वे भाजपा के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे। पार्टी के भीतर जारी इन चर्चाओं ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।