BCKhanduri – सैन्य अनुशासन और सादगी से अलग पहचान बना गए खंडूड़ी
BCKhanduri – उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन के बाद देहरादून स्थित उनके आवास पर शोक का माहौल पसरा रहा। वसंत विहार स्थित घर पर जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, तो परिवार के सदस्य भावुक हो उठे। उनकी पत्नी अरुणा खंडूड़ी ने नम आंखों से पति को श्रद्धांजलि दी, जबकि बेटे मनीष खंडूड़ी भी गहरे दुख में दिखाई दिए। बुधवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बीसी खंडूड़ी को उत्तराखंड की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और अनुशासित नेतृत्व के लिए जाना जाता था। सेना से राजनीति तक का उनका सफर लंबे समय तक लोगों के लिए प्रेरणा बना रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में ईमानदारी और सादगी को हमेशा प्राथमिकता दी, जिसकी वजह से वे आम लोगों के बीच अलग पहचान रखते थे।
सेना से राजनीति तक का अनुशासित सफर
भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की थी। वर्ष 1954 में उन्होंने कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन प्राप्त किया और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। सैन्य सेवाओं के दौरान उन्होंने इंजीनियरिंग और आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली में अनुशासन और स्पष्टता हमेशा दिखाई देती थी। सेना में उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया था।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। भाजपा ने 1991 में उन्हें पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। हालांकि 1996 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद के वर्षों में वे फिर संसद पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
सड़क विकास योजनाओं में निभाई अहम भूमिका
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री रहते हुए खंडूड़ी ने उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई पहल कीं। पर्वतीय क्षेत्रों में संपर्क मार्गों के विस्तार और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को गति देने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। वर्तमान ऑल वेदर रोड परियोजना की बुनियाद भी उनके कार्यकाल में मजबूत हुई थी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शिता पर जोर दिया। उनके फैसलों में सख्ती के साथ साफ नीयत दिखाई देती थी। सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने के लिए उन्होंने कई कदम उठाए, जिन्हें आज भी याद किया जाता है।
लोकायुक्त कानून से बनाई अलग पहचान
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले नेताओं में बीसी खंडूड़ी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्ष 2011 में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने उत्तराखंड में मजबूत लोकायुक्त विधेयक लागू करने की पहल की थी। इस कानून में मुख्यमंत्री को भी जांच के दायरे में लाने का प्रावधान शामिल था। उस समय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी इस कदम की सार्वजनिक सराहना की थी।
हालांकि बाद में सत्ता परिवर्तन के चलते यह विधेयक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया, लेकिन खंडूड़ी की राजनीतिक इच्छाशक्ति की चर्चा पूरे देश में हुई। उनके कार्यकाल में तबादला कानून जैसे फैसलों को भी प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
सादगी और ईमानदारी के लिए रहेंगे याद
बीसी खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान की पढ़ाई की और फिर सेना में सेवा दी। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी नहीं छोड़ी। 2007 और 2011 में दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2012 में चुनाव हारने के बावजूद जनता के बीच उनकी लोकप्रियता बनी रही।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी आक्रामक शैली नहीं अपनाई, लेकिन अपने निर्णयों में हमेशा दृढ़ रहे। उत्तराखंड के विकास और स्वच्छ राजनीति की चर्चा जब भी होगी, बीसी खंडूड़ी का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा।