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SaudiRelease – दो दशक बाद सऊदी जेल से घर लौटेंगे केरल के अब्दुल रहीम

SaudiRelease – करीब 20 वर्षों तक सऊदी अरब की जेल में मौत की सजा का सामना कर रहे केरल के अब्दुल रहीम की आखिरकार घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। लंबे कानूनी संघर्ष, सामाजिक समर्थन और करोड़ों रुपये के सामूहिक फंड अभियान के बाद अब वह जल्द अपने परिवार से मिल सकेंगे। पीड़ित परिवार द्वारा मुआवजे की राशि स्वीकार किए जाने के बाद उनकी फांसी की सजा समाप्त कर दी गई है और अब केवल अंतिम कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

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बेहतर भविष्य की तलाश में गए थे सऊदी

केरल के कोझिकोड जिले के रहने वाले अब्दुल रहीम अपने परिवार में छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए वह स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा और स्कूल बस चलाकर गुजारा करते थे। रोजगार की बेहतर संभावनाओं की उम्मीद में वह नवंबर 2006 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे थे, जहां उन्हें ड्राइवर की नौकरी मिली।

नौकरी के साथ उन्हें अपने मालिक के 17 वर्षीय बेटे की देखभाल का दायित्व भी दिया गया था। किशोर गंभीर रूप से बीमार था और जीवन रक्षक उपकरणों की मदद से सांस ले रहा था। दिसंबर 2006 में यात्रा के दौरान अचानक उसका ब्रीदिंग सपोर्ट सिस्टम हट गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद रहीम को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वर्षों बाद अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

कानूनी लड़ाई के बीच बदली किस्मत

सालों तक चली अदालती प्रक्रिया के दौरान रहीम की सजा को ऊपरी अदालतों ने भी बरकरार रखा। परिवार के लिए यह समय बेहद मुश्किल भरा रहा। हालांकि, 2022 में मामले में नया मोड़ आया, जब पीड़ित परिवार मध्यस्थता के लिए तैयार हुआ। बाद में उन्होंने आर्थिक मुआवजा स्वीकार करने पर सहमति जताई।

बताया गया कि रहीम की जान बचाने के लिए लगभग 34 करोड़ रुपये की राशि तय की गई थी। इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके परिवार के लिए संभव नहीं था। इसके बाद केरल में स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक जनअभियान शुरू किया, जिसने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा।

आम लोगों ने जुटाई करोड़ों की मदद

मार्च 2024 में शुरू हुए इस अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला। प्रवासी भारतीयों, मजदूरों, सामाजिक संगठनों और कई प्रसिद्ध हस्तियों ने आर्थिक सहयोग दिया। छोटे-छोटे दान मिलकर एक बड़े अभियान में बदल गए। कुछ ही हफ्तों में पूरी राशि जमा कर ली गई, जिसने रहीम की जिंदगी को नया मोड़ दे दिया।

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं थी, बल्कि मानवीय सहयोग और सामाजिक एकजुटता की मिसाल भी बनी। लोगों ने इसे उम्मीद और इंसानियत की ताकत के रूप में देखा।

परिवार ने वर्षों तक किया इंतजार

रहीम का परिवार बीते दो दशकों से लगातार मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। उनके भाई नजीर के मुताबिक, परिवार हर दिन किसी नई खबर की प्रतीक्षा में रहता था। रहीम की गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी मां भी लंबे समय तक बेटे से मुलाकात नहीं कर सकीं।

रिपोर्टों के अनुसार, कई वर्षों बाद उन्हें पहली बार जेल में बेटे से मिलने का अवसर मिला। परिवार के लिए वीडियो कॉल ही एकमात्र सहारा था, जिसके जरिए वे संपर्क बनाए रखते थे। अब रिहाई की खबर ने पूरे परिवार में राहत और भावुक माहौल पैदा कर दिया है।

अंतिम प्रक्रिया के बाद होगी रिहाई

मुआवजे की राशि मिलने के बाद रहीम की फांसी की सजा तो समाप्त हो गई, लेकिन सऊदी कानून के तहत उन्हें निर्धारित जेल अवधि पूरी करनी थी। जानकारी के अनुसार, उनकी 20 साल की सजा की अवधि अब पूरी हो चुकी है। भारतीय दूतावास के अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी कराने में जुटे हुए हैं।

अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही रहीम को रिहा कर दिया जाएगा। परिवार अब उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब वह करीब दो दशक बाद अपने घर की दहलीज पर कदम रखेंगे।

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