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SupremeCourt – धार्मिक मामलों और शराब पैकेजिंग पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। एक मामले में गुरुद्वारा समितियों में कथित फंड अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर अदालत ने याचिकाकर्ता को संसद की समिति से संपर्क करने की सलाह दी। वहीं दूसरे मामले में टेट्रा पैक और पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब बिक्री को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया।

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इन दोनों मामलों ने धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर नई बहस को जन्म दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में कानून में बदलाव की आवश्यकता हो, वहां संसद की भूमिका अहम होती है।

गुरुद्वारा समिति मामले में संसद जाने की सलाह

गुरुद्वारा समितियों में फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर एक बुजुर्ग याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने अदालत से अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर कानून में संशोधन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके लिए संसद के समक्ष जाना अधिक उचित होगा।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि अदालत ऐसे धार्मिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करती है तो इसे धर्म संबंधी मामलों में न्यायपालिका की दखलअंदाजी के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता संसद की याचिका समिति के सामने अपनी बात रखें।

धार्मिक मामलों में संतुलन की जरूरत

सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े विवादों में संवैधानिक संस्थाओं को सावधानी से काम करना पड़ता है। न्यायपालिका का उद्देश्य कानून की व्याख्या करना है, जबकि नीतिगत और विधायी बदलाव संसद के दायरे में आते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

शराब पैकेजिंग मामले पर सरकार से सवाल

दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक और पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब बिक्री से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। यह याचिका ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ नामक संगठन की ओर से दायर की गई थी।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह की पैकेजिंग कई बार उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा करती है, क्योंकि कुछ पैकेट देखने में फलों के जूस जैसे लगते हैं। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि पैकेजिंग पर फलों की तस्वीरें होने से उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को लेकर गलतफहमी हो सकती है।

एक समान नीति की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति तैयार करने की मांग की गई है। इसमें सुझाव दिया गया है कि शराब की बिक्री केवल पारदर्शी बोतलों या निर्धारित कंटेनरों में ही की जाए।

याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि मौजूदा आबकारी नियमों में ‘बोतल’ की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण अलग-अलग प्रकार की पैकेजिंग बाजार में उपलब्ध है। उनका तर्क है कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़े सवाल भी उठते हैं।

सरकार की जिम्मेदारी पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी कहा गया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र राज्यों के साथ समन्वय कर ऐसी नीति बनाए जिससे शराब उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री को लेकर स्पष्ट नियम तय किए जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।

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