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BiogasPlan – ऊर्जा संकट के बीच वैकल्पिक ईंधन पर सरकार का जोर…

BiogasPlan – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर के बीच केंद्र सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करने के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की और रसोई गैस के विकल्प के रूप में बायोगैस को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले ऊर्जा विकल्प भविष्य में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकते हैं।

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सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ऊर्जा आपूर्ति, बढ़ती लागत और वैश्विक परिस्थितियों के असर पर कई मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार अब ऐसे विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो लंबे समय में टिकाऊ और किफायती साबित हो सकें।

विदेश दौरे से लौटते ही हुई अहम बैठक

प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और यूरोप के चार देशों की यात्रा से लौटे हैं। विदेश दौरे के तुरंत बाद उन्होंने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय हालात और उनके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई।

बैठक की शुरुआत विदेश मंत्री एस. जयशंकर की प्रस्तुति से हुई, जिसमें उन्होंने विदेश यात्रा के दौरान हुई प्रमुख बातचीत और सहयोग से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी। इसके बाद विभिन्न मंत्रालयों ने अपनी-अपनी प्रगति रिपोर्ट और रणनीतिक योजनाएं साझा कीं।

बायोगैस और स्वदेशी ऊर्जा विकल्प पर फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना आने वाले वर्षों की बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बायोगैस, जैव ईंधन और अन्य वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस परियोजनाएं रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा दोनों उपलब्ध करा सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकट के समय आयात आधारित ईंधन पर निर्भरता आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आम लोगों पर असर कम करने के निर्देश

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी नई नीति या सुधार का असर आम नागरिकों पर नकारात्मक नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों को निर्देश दिया कि योजनाओं को इस तरह लागू किया जाए जिससे लोगों के दैनिक जीवन में सुविधा बढ़े।

सरकार का फोकस ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आम लोगों के जीवन को आसान बनाने पर रहेगा। अधिकारियों से कहा गया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाया जाए ताकि लोगों को सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।

विकसित भारत लक्ष्य का दोहराया जिक्र

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दीर्घकालिक योजना नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास को नई दिशा देने का संकल्प है।

उन्होंने मंत्रियों से सुधारों को तेज गति से लागू करने और परिणाम आधारित कामकाज पर ध्यान देने को कहा। सरकार का मानना है कि ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में बदलाव से आने वाले वर्षों में देश की विकास गति मजबूत हो सकती है।

मंत्रालयों के कामकाज की हुई समीक्षा

बैठक में कई प्रमुख मंत्रालयों ने बीते दो वर्षों के कामकाज का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। इसमें कृषि, सड़क परिवहन, ऊर्जा, वाणिज्य और श्रम मंत्रालय शामिल रहे। अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश और प्रशासनिक सुधारों पर जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में मंत्रालयों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन भी किया गया। फाइलों के निपटान और जन शिकायतों के समाधान जैसे बिंदुओं पर विभिन्न विभागों की समीक्षा की गई। सरकार आने वाले समय में प्रदर्शन आधारित प्रशासनिक सुधारों पर और अधिक जोर दे सकती है।

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