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MoneyLaundering – वीणा विजयन मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर हुई छापेमारी…

MoneyLaundering – केरल में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बड़ा अभियान चलाया। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े परिसरों समेत कई स्थानों पर तलाशी कार्रवाई की। यह कार्रवाई उनकी बेटी वीणा विजयन की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस और कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) के बीच हुए संदिग्ध लेनदेन की जांच के तहत की जा रही है।

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सूत्रों के अनुसार, ED की टीमें सुबह से ही अलग-अलग स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में जुटी रहीं। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान उन आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए चलाया जा रहा है, जिनकी जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की जा रही है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर रोक लगाने की मांग ठुकरा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि एजेंसी को वित्तीय लेनदेन की जांच करने और आवश्यक पूछताछ करने का अधिकार है। कोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता और बढ़ गई।

मामले में याचिका दायर करने वाले पक्ष ने अदालत में कहा था कि जिस लेनदेन की जांच हो रही है, वह मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में नहीं आता। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि मामले की जांच पहले से गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय यानी SFIO कर रहा है, इसलिए समानांतर जांच की जरूरत नहीं है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद कुछ साल पहले आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद सामने आया था। जांच में कथित तौर पर यह जानकारी मिली थी कि CMRL ने 2017 से 2019 के बीच एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को करीब 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि भुगतान के बदले कोई वास्तविक आईटी या सॉफ्टवेयर सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

इसी आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भुगतान का उद्देश्य क्या था और लेनदेन के पीछे किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई।

अदालत ने क्या कहा

केरल हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को पूछताछ और समन जारी करने के लिए हर मामले में अलग से एफआईआर की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने यह भी माना कि SFIO और ED की जांच का दायरा अलग-अलग है, इसलिए दोनों एजेंसियां अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई कर सकती हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह संकेत दिया कि आर्थिक अपराधों की जांच में एजेंसियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अधिकार प्राप्त हैं। इसी फैसले के बाद ED ने जांच को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

मामले को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री पर सवाल उठा रहा है, जबकि वाम दलों का कहना है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि ED की ओर से अब तक केवल जांच प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी ही साझा की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में केरल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब जांच एजेंसियां वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं। फिलहाल सभी की नजरें ED की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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