बिहार

EducationReform – बिहार में शिक्षकों की छुट्टियों पर लगी अस्थायी रोक

EducationReform – बिहार सरकार ने ग्रीष्मावकाश से पहले स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों की छुट्टियों पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक 27 मई से 31 मई तक शिक्षक अवकाश नहीं ले सकेंगे और सभी को अंतिम कार्य दिवस तक विद्यालय में उपस्थित रहना होगा। विभाग ने कहा है कि इस अवधि में छात्रों की पढ़ाई नियमित रूप से जारी रहनी चाहिए।

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छात्रों को दिया जाएगा विषयवार गृहकार्य

शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि गर्मी की छुट्टियों से पहले विद्यार्थियों को हर विषय का गृहकार्य दिया जाए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दिए गए कार्य की जानकारी छात्रों की डायरी में दर्ज हो। अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा अवकाश आवेदन दिए जा रहे थे, जिससे शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका थी।

विभाग का मानना है कि सत्र के इस महत्वपूर्ण समय में शिक्षकों की उपस्थिति जरूरी है ताकि पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित न हो।

उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी

स्कूल शिक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया है कि बिहार के कॉलेजों को देश के शीर्ष दस विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाए। सरकार का उद्देश्य राज्य के कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाना और बाहरी राज्यों के छात्रों को भी आकर्षित करना है।

उच्च शिक्षा विभाग को इस दिशा में जल्द कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य के कॉलेजों को बेहतर अकादमिक सहयोग और संसाधन मिल सकेंगे।

डिग्री कॉलेज विहीन प्रखंडों में शुरू होगी पढ़ाई

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन 211 प्रखंडों में अब तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां एक जुलाई से स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू कराई जाए। इन क्षेत्रों में नए महाविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।

सरकार ने शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए समिति गठित करने तथा रिक्त पदों को जल्द भरने की बात कही है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कॉलेज ऐसी जगह स्थापित किए जाएं जहां छात्रों को आने-जाने में किसी तरह की परेशानी न हो।

भूमि दानदाताओं के नाम पर होंगे कॉलेज

सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत एक और अहम निर्णय लिया है। जिन लोगों द्वारा कॉलेज निर्माण के लिए जमीन दान की जाएगी, उनके नाम पर संबंधित महाविद्यालय का नाम रखा जाएगा। इसके अलावा भवन निर्माण या अन्य सहयोग करने वाले लोगों के नाम पर परिसर के कुछ हिस्सों का नामकरण भी किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा क्षेत्र में सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर संस्थानों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

ओपन यूनिवर्सिटी और शोध संस्थानों पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को देश के विभिन्न राज्यों में संचालित ओपन यूनिवर्सिटी की व्यवस्था का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। इसके आधार पर बिहार में भी नई ओपन यूनिवर्सिटी स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ शिक्षा को मजबूत करना और विश्वविद्यालयों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।

इसके अलावा राज्य के शोध संस्थानों और रिसर्च सेंटरों को फिर से व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शोध संस्थान प्रभावी तरीके से काम करेंगे तो नीतियों और योजनाओं के बेहतर मूल्यांकन में मदद मिलेगी।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय परियोजना पर भी चर्चा

बैठक में विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि जल्द केंद्र सरकार को हस्तांतरित की जाए। इसके लिए भारत सरकार को औपचारिक पत्र भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

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