Justice Demand – आरजी कर पीड़िता की मां ने मंत्री न बनने पर दी प्रतिक्रिया
Justice Demand – आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित दुष्कर्म और हत्या मामले की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मंत्रिपरिषद में स्थान नहीं मिलने से उन्हें किसी प्रकार की निराशा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी सत्ता या पद हासिल करना नहीं रहा, बल्कि अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ना और जनता की सेवा करना उनकी प्राथमिकता है।

राजनीति में आने का उद्देश्य बताया
रत्ना देबनाथ ने कहा कि उन्होंने कभी मंत्री बनने की उम्मीद नहीं की थी। उनके अनुसार, राजनीति में प्रवेश उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। उन्होंने बताया कि अपनी बेटी के साथ हुई दर्दनाक घटना के बाद न्याय की मांग को लेकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उनका कहना था कि चाहे वह विधायक बनतीं या नहीं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा था और आज भी है।
देबनाथ ने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु हमेशा न्याय और जनसेवा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर पार्टी की ओर से उनसे कभी कोई चर्चा नहीं की गई थी और उन्होंने भी इस तरह की कोई अपेक्षा नहीं रखी थी।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आई प्रतिक्रिया
उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। हाल ही में हुए इस विस्तार के बाद कई नए विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि कुछ नाम ऐसे भी रहे जिन्हें लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थीं लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली।
पनिहाटी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली रत्ना देबनाथ और हिंगलगंज की विधायक रेखा पात्रा के नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में थे। हालांकि अंतिम सूची में दोनों को शामिल नहीं किया गया।
भाजपा ने अटकलों को बताया निराधार
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान इन दोनों विधायकों के नामों पर विचार किए जाने की बात सही नहीं है। उनके मुताबिक यह निर्णय संगठनात्मक जरूरतों और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल गठन में कई कारकों को महत्व दिया गया और इसी आधार पर नए मंत्रियों का चयन किया गया। ऐसे में बाहर रह गए नेताओं को लेकर चल रही अटकलों का कोई आधार नहीं था।
रेखा पात्रा ने भी जनसेवा पर दिया जोर
हिंगलगंज से पहली बार विधायक बनीं रेखा पात्रा ने मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने के सवाल पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि उनकी प्राथमिकता अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना है और वह उसी दिशा में ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं।
35 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ
सोमवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई। स्वपन दासगुप्ता, तापस रॉय और शंकर घोष उन प्रमुख नामों में शामिल रहे जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार के बाद राज्य मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
रत्ना देबनाथ के बयान ने यह संकेत दिया है कि वह राजनीतिक पदों से अधिक अपने क्षेत्र की जनता और न्याय की लड़ाई को प्राथमिकता देती हैं। उनका कहना है कि विधायक के रूप में वह आगे भी लोगों की समस्याओं के समाधान और जनकल्याण के लिए काम करती रहेंगी।