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West Bengal Politics – टीएमसी में बड़े विभाजन के बाद चर्चा में आए ऋतब्रत बनर्जी

West Bengal Politics – पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर एक नया शक्ति केंद्र उभरकर सामने आया है। विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन मिलने के बाद इस नए समूह को मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता भी मिल गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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ऋतब्रत बनर्जी का राजनीतिक सफर

ऋतब्रत बनर्जी का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया नहीं है। उनकी शुरुआती राजनीतिक पहचान वामपंथी छात्र राजनीति से बनी थी। वह स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और छात्र संगठन के महासचिव पद तक पहुंचे। वामपंथी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें कम उम्र में ही राज्यसभा भेजा गया था, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हालांकि, वर्ष 2017 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने उन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा बदली और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।

टीएमसी में बढ़ी जिम्मेदारियां

टीएमसी में शामिल होने के बाद ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी के ट्रेड यूनियन संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई। बाद में पूर्व सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पूर्व सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत किया।

हाल के दिनों में उनकी राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में रहीं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से उनकी मुलाकात और हस्ताक्षर संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए सवालों ने भी राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की थी। इन मामलों की जांच अभी जारी बताई जा रही है।

58 विधायकों का समर्थन बना निर्णायक

बुधवार को विधानसभा में स्थिति तब बदली जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह ने स्वयं को असली तृणमूल कांग्रेस विधायक दल बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दावा पेश किया। इस समूह के समर्थन में 58 विधायकों के हस्ताक्षरित पत्र सौंपे गए।

विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद इस गुट को मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता दे दी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन मिलना राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

नए विधायक दल का गठन

मान्यता मिलने के बाद नए गुट ने अपने संगठनात्मक ढांचे की भी घोषणा कर दी। ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना गया। जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया।

इससे पहले विधानसभा परिसर में आयोजित बैठक में शामिल अधिकांश विधायक हाल ही में कोलकाता में आयोजित ममता बनर्जी के धरना कार्यक्रम से दूर रहे थे। इस वजह से पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चाएं और तेज हो गई थीं।

दलबदल कानून की कसौटी

राजनीतिक घटनाक्रम के बीच दलबदल विरोधी कानून भी चर्चा का विषय बन गया है। नियमों के अनुसार, किसी भी विधायक समूह को अलग पहचान बनाए रखने और सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए मूल विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन हासिल होना आवश्यक होता है।

विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायक होने के आधार पर यह संख्या 54 विधायकों की बनती है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के पास 58 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है, जिससे कानूनी रूप से उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

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