उत्तराखण्ड

Martyrdom – कैप्टन बनने से पहले देश पर कुर्बान हुए अल्मोड़ा के वीर अधिकारी

Martyrdom – जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। युवा सैन्य अधिकारी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके ने एक होनहार बेटे को खोने का दुख महसूस किया।

almora army officer martyred before promotion

हाल ही में अभियान का हिस्सा बने थे बीरेश्वर

मूल रूप से द्वाराहाट क्षेत्र के बग्वालीपोखर से जुड़े और वर्तमान में अल्मोड़ा के पाण्डेखोला क्षेत्र में रहने वाले 25 वर्षीय बीरेश्वर गोस्वामी भारतीय सेना में एक उभरते हुए अधिकारी थे। सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें जून 2024 में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला था। बताया गया कि वह कुछ दिन पहले ही राजौरी में चल रहे सैन्य अभियान से जुड़े थे। ड्यूटी के दौरान उन्होंने साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

घर में प्रमोशन की खुशियां, फिर पहुंची शहादत की खबर

परिवार और सैन्य साथियों के लिए यह क्षण और भी भावुक इसलिए बन गया क्योंकि बीरेश्वर जल्द ही सेना में अगली जिम्मेदारी संभालने वाले थे। सैन्य नियमों के अनुसार उनकी सेवा अवधि का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा होने वाला था और उन्हें कैप्टन रैंक मिलने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। परिजनों के अनुसार उनके नए पद से जुड़े प्रतीक चिह्न और आवश्यक सामग्री भी यूनिट तक पहुंच चुकी थी। पूरे परिवार में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह था, लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था।

मां की आंखों में इंतजार, जो अधूरा रह गया

शहादत की सूचना मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। स्कूल में प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्यरत उनकी मां सरस्वती गोस्वामी बार-बार बेटे की याद में भावुक होती रहीं। परिजनों के अनुसार बीरेश्वर ने जल्द घर आने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह वादा पूरा नहीं हो सका। अंतिम दर्शन के दौरान मां का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

दादी और पिता की पीड़ा ने किया भावुक

शहीद अधिकारी के पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी प्रशासनिक सेवा से जुड़े हैं। बेटे की शहादत ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया। बड़े भाई अमित गोस्वामी भी अंतिम विदाई के दौरान भावुक नजर आए। परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य, 83 वर्षीय दादी नंदी देवी अपने पोते को खोने के गम में बेहद व्यथित दिखीं। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार का दर्द देखकर स्थानीय लोग भी खुद को संभाल नहीं पाए।

दो वर्ष की सेवा पूरी होने वाली थी

सैन्य अधिकारियों के अनुसार भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त अधिकारी को दो वर्ष की सफल और संतोषजनक सेवा के बाद समयबद्ध पदोन्नति के तहत कैप्टन रैंक प्रदान की जाती है। बीरेश्वर गोस्वामी भी इसी उपलब्धि के बेहद करीब थे। 8 जून को उनकी सेवा के दो वर्ष पूरे होने वाले थे और इसके साथ ही उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने की तैयारी थी। उनका सेवा रिकॉर्ड भी उत्कृष्ट माना जा रहा था।

पूरे क्षेत्र ने दी श्रद्धांजलि

बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत पर जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी सहित कई लोगों ने उनके साहस और समर्पण को नमन किया। लोगों का कहना है कि बीरेश्वर ने कम उम्र में ही देशसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। तिरंगे में लिपटे इस वीर अधिकारी को अंतिम विदाई देते समय हर आंख नम थी, लेकिन साथ ही उनके बलिदान पर गर्व भी झलक रहा था।

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