Bollywood – फिल्म इंडस्ट्री में असुरक्षा और सीखने की संस्कृति पर बोलीं कंगना रनौत…
Bollywood – कंगना रनौत ने एक हालिया बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री के माहौल, कलाकारों के बीच बढ़ती असुरक्षा और एक-दूसरे से सीखने की जरूरत पर खुलकर अपने विचार रखे। अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री ने कहा कि सफलता या उपलब्धियां किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को हमेशा तय नहीं करतीं, क्योंकि कई बार सब कुछ होने के बावजूद लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

असुरक्षा को मानसिक स्थिति से जोड़ा
कंगना के अनुसार, असुरक्षा और ईर्ष्या जैसी भावनाएं लगभग हर व्यक्ति के भीतर मौजूद होती हैं, लेकिन यह पूरी तरह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह इन भावनाओं को अपने व्यवहार और सोच पर कितना प्रभाव डालने देता है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग बिना किसी वास्तविक कारण के खुद को दूसरों से कम आंकने लगते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और व्यक्तित्व प्रभावित होता है।
नकारात्मक भावनाओं को खुद पर हावी नहीं होने दिया
अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन और करियर की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि नकारात्मक भावनाओं को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगी। उनका मानना है कि व्यक्ति के पास क्या है और क्या नहीं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह खुद को किस नजर से देखता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच इंसान को आगे बढ़ने में मदद करती है।
दूसरों से प्रतिस्पर्धा नहीं, सीखने का नजरिया
कंगना ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कम अनुभवी या कम सक्षम है तो वह उसका मार्गदर्शन करना पसंद करेंगी। वहीं, यदि कोई उनसे अधिक प्रतिभाशाली है तो उससे सीखना बेहतर विकल्प है। उनके मुताबिक, सीखने की भावना रखने वाले व्यक्ति के मन में असुरक्षा के लिए बहुत कम जगह बचती है।
शुरुआती संघर्षों को किया याद
बातचीत के दौरान कंगना ने अपने शुरुआती दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में घर छोड़कर मनोरंजन जगत में कदम रखने के समय उनके लिए कई चीजें बिल्कुल नई थीं। उस दौर में उन्होंने आसपास के लोगों को देखकर और उनके काम करने के तरीके को समझकर बहुत कुछ सीखा। उनका कहना था कि अनुभव और अवलोकन ने उन्हें आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दीपिका पादुकोण से सीखी अनुशासन की आदत
कंगना ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से भी कई बातें सीखी हैं। उन्होंने बताया कि दीपिका के खेल पृष्ठभूमि से आने के कारण उनके जीवन में अनुशासन और फिटनेस को लेकर विशेष गंभीरता दिखाई देती थी। कंगना ने कहा कि उन्होंने यह देखा और उससे प्रेरणा भी ली। उनके मुताबिक, किसी की अच्छी आदतों और गुणों को पहचानना सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रशंसा से मिलती है सीखने की प्रेरणा
कंगना का मानना है कि जब तक किसी व्यक्ति की प्रतिभा, सुंदरता या मेहनत को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक उससे सीखना भी कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि दूसरों की खूबियों की सराहना करना सीखने और खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
बदलते दौर में कम हुआ आपसी जुड़ाव
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि पहले के दशकों में कलाकारों और लोगों के बीच अधिक दोस्ताना संबंध देखने को मिलते थे, जबकि आज के समय में आपसी संवाद और खुलापन कम हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के बीच एक-दूसरे की तारीफ करने की संस्कृति में कमी आने की बात कही और इसे बदलते सामाजिक माहौल से जोड़ा।