Diplomacy – अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर ट्रंप का नया दावा, यूरोप में हो सकती है अंतिम मुहर
Diplomacy – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और समझौता पहले से कहीं अधिक करीब है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई औपचारिक समझौता होता है तो उस पर हस्ताक्षर पाकिस्तान में नहीं, बल्कि यूरोप के किसी देश में किए जाने की संभावना है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से ट्रंप के दावों को स्वीकार नहीं किया गया है।

समझौते को लेकर ट्रंप का भरोसा
मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान का शीर्ष नेतृत्व इस समझौते के लिए तैयार हो चुका है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जवाब सकारात्मक है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियारों से जुड़ी गतिविधियों को छोड़ने के लिए तैयार है और न तो ऐसे हथियार हासिल करेगा और न ही उनके विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे, लेकिन अब बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में प्रगति दिखाई दे रही है।
हालिया तनाव के बाद बदला रुख
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया था। युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों पर हमलों के आरोप लगे, जिससे क्षेत्रीय स्थिति और संवेदनशील हो गई। इस बीच ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह अब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने दावा किया कि बातचीत ईरानी नेतृत्व के उच्चतम स्तर तक पहुंच चुकी है और उसे आवश्यक स्वीकृति भी मिल गई है।
युद्धविराम को लेकर भी संकेत
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने के प्रयासों में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है। उनके अनुसार, अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों के बीच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। हालांकि उन्होंने इन चर्चाओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो यह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
तेल क्षेत्र को लेकर पहले दी थी चेतावनी
इस नरम रुख से पहले ट्रंप ने ईरान के तेल क्षेत्र को लेकर कड़े बयान दिए थे। उन्होंने कई मौकों पर ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप का उल्लेख करते हुए वहां कार्रवाई की संभावना जताई थी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर अक्सर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देता है, क्योंकि तेल आपूर्ति को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं।
खार्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व
फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश के अधिकांश तेल निर्यात का संचालन इसी द्वीप के माध्यम से होता है। यही कारण है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चर्चाओं में इसका नाम बार-बार सामने आता है। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा था कि उनकी प्राथमिकताओं में खार्ग द्वीप का मुद्दा शामिल रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसी किसी कार्रवाई के लिए राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर बड़े फैसलों की आवश्यकता होगी।