Bullion Market – वैश्विक दबाव के बीच सोना-चांदी के दामों में बड़ी गिरावट
Bullion Market – वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर शुक्रवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार पर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सोना और चांदी दोनों ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने कीमती धातुओं की कीमतों पर असर डाला है। निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ने से बुलियन बाजार में बिकवाली का माहौल देखा गया।

एमसीएक्स पर सोना और चांदी फिसले
सुबह के कारोबार में एमसीएक्स पर सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। करीब 11 बजे सोना 5,350 रुपये कमजोर होकर 1,46,240 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी दौरान चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली और इसका भाव 8,899 रुपये टूटकर 2,28,721 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
बाजार जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर रुझान और निवेशकों की बदली रणनीति का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
शुरुआती कारोबार में भी रहा दबाव
शुक्रवार को सोने के वायदा अनुबंध की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई। सोना अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में ही गिरावट के दायरे में बना रहा। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी के अनुबंध में भी शुरुआत से ही दबाव देखा गया, जिससे इसके दाम में हजारों रुपये की कमी दर्ज हुई।
इससे संकेत मिलते हैं कि बाजार प्रतिभागी फिलहाल जोखिम वाले निवेश की बजाय अन्य विकल्पों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेत
विदेशी बाजारों में भी सोना लगातार दबाव में बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट की दिशा में बढ़ती दिख रही हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
स्पॉट गोल्ड और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर दोनों में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी भी निचले स्तरों पर कारोबार करती दिखाई दी। वैश्विक बाजारों में आई यह नरमी भारतीय बाजार के लिए भी प्रमुख संकेतक बनी हुई है।
डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह
अमेरिकी मुद्रा में आई तेजी की वजह से सोने और चांदी की मांग पर असर पड़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य देशों के निवेशकों के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियां महंगी हो जाती हैं। इसका असर कीमती धातुओं की खरीदारी पर पड़ता है और मांग में कमी आने लगती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर बने रहने तक सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
ब्याज दरों को लेकर बदली बाजार की धारणा
हाल ही में फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन भविष्य को लेकर दिए गए संकेतों ने बाजार की उम्मीदों को बदल दिया है। अब बड़ी संख्या में निवेशक यह मान रहे हैं कि वर्ष के अंत तक अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।
उच्च ब्याज दरों के माहौल में सोना अपेक्षाकृत कम आकर्षक माना जाता है क्योंकि इस निवेश पर कोई निश्चित ब्याज प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चा से भी सोने की कीमतें प्रभावित होती हैं।
प्रमुख वित्तीय संस्थान ने घटाया अनुमान
वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भी सोने की कीमतों को लेकर अपना पूर्वानुमान कम कर दिया है। बैंक ने वर्ष के अंत तक सोने के संभावित भाव का अनुमान पहले की तुलना में घटाया है। इसके पीछे मुख्य वजह अमेरिका में ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कमजोर पड़ना बताया गया है।
भू-राजनीतिक घटनाओं का भी असर
ऊर्जा बाजार में आई नरमी ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया से जुड़े कुछ सकारात्मक घटनाक्रमों के चलते महंगाई संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। इससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग प्रभावित हुई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में डॉलर, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों की दिशा सोना और चांदी की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।