उत्तर प्रदेश

FireTragedy – अलीगंज अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा व्यवस्था की खामियां

FireTragedy – लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक प्रशिक्षण केंद्र में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे में कई लोगों की जान गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आग लगने के बाद इमारत के भीतर फंसे लोगों ने जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस घटना ने एक बार फिर व्यावसायिक उपयोग में लाई जा रही इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

aliganj fire exposes building safety lapses

घटना सोमवार दोपहर अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला भवन में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग तेजी से फैल गई और कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर में धुआं भर गया। अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जान बचाने के प्रयास में युवक गंभीर रूप से घायल

हादसे के दौरान 26 वर्षीय एक युवक ने आग और धुएं से बचने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। नीचे उतरते समय वह भवन के प्रवेश द्वार पर लगी लोहे की ग्रिल की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

परिजनों के अनुसार युवक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल था और घटना के समय भवन के भीतर मौजूद था। अचानक फैले धुएं और आग के कारण उसे बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं दिखाई दिया, जिसके चलते उसने यह जोखिम भरा कदम उठाया।

खिड़की तोड़कर बाहर निकले कई लोग

हादसे से बचकर निकले कुछ लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में हालात बेहद भयावह हो गए थे। उत्तराखंड निवासी एक युवक ने बताया कि चारों ओर घना धुआं फैल गया था और सामान्य रास्तों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।

उसने बताया कि मजबूरी में खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया गया। इसके बाद भवन के बाहरी हिस्से में मौजूद पाइप और रेलिंग का सहारा लेकर नीचे उतरना पड़ा। कई लोगों ने इसी तरह अपनी जान बचाने की कोशिश की।

परिजनों के लिए बन गया दर्दनाक पल

इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए यह घटना जीवनभर का दुख बन गई है। मृतकों में शामिल कुछ युवाओं के परिजनों ने बताया कि हादसे के दौरान उनके बच्चों ने फोन कर मदद मांगी थी। आग और धुएं के बीच फंसे होने की जानकारी देते हुए उन्होंने बाहर निकलने में आ रही मुश्किलों का जिक्र किया था।

परिवारों का कहना है कि कुछ लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका। घटना के बाद अस्पतालों और पोस्टमार्टम केंद्रों पर परिजनों की भीड़ लगी रही, जहां अपनों की जानकारी पाने के लिए लोग घंटों इंतजार करते रहे।

हादसे के बाद प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

घटना के बाद प्रशासनिक विभागों ने भवन की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसका मूल स्वीकृत उपयोग और वर्तमान उपयोग अलग था। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों, अग्निशमन प्रबंधों और अन्य आवश्यक नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है।

इसी क्रम में संबंधित भवन को नोटिस जारी किया गया है। भवन स्वामियों से निर्धारित अवधि के भीतर जवाब मांगा गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या संचालन के दौरान सुरक्षा संबंधी नियमों का पूर्ण पालन किया गया था या नहीं।

सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे व्यावसायिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की भी परीक्षा बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले भवनों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, पर्याप्त निकास मार्ग और आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।

घटना के बाद शहर में संचालित अन्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग भी तेज हो गई है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे भवनों का निरीक्षण अभियान चलाया जा सकता है।

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