राष्ट्रीय

MPLADS – बागी सांसदों के फंड उपयोग पर उठे नए सवाल

MPLADS – उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जिन सांसदों ने दल बदलते समय अपने क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलने की बात कही थी, उनके कामकाज से जुड़े सरकारी आंकड़े अब अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सांसदों ने पिछले कुछ वर्षों में उपलब्ध कराए गए फंड का सीमित उपयोग किया है, जिससे उनके पहले के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

mplads fund use questioned by rebel mps

उपलब्ध राशि के मुकाबले कम खर्च

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत प्रत्येक सांसद को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए हर वर्ष 5 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाती है। यदि किसी वर्ष पूरी राशि खर्च नहीं होती तो शेष रकम अगले वित्तीय वर्ष में जुड़ जाती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन छह सांसदों के पास कुल मिलाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध थी, लेकिन इसका एक छोटा हिस्सा ही विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च किया गया।

अलग-अलग सांसदों का प्रदर्शन

जारी आंकड़ों में हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर सबसे आगे दिखाई देते हैं। उन्होंने उपलब्ध राशि का लगभग 26.84 प्रतिशत उपयोग किया। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तावित 107 विकास कार्यों में से केवल 28 पूरे हो पाए हैं, जबकि शेष परियोजनाओं पर अभी काम जारी है।

दूसरी ओर, मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल का प्रदर्शन सबसे कमजोर माना गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने कुल फंड का केवल 1.07 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग किया। उनके द्वारा सुझाए गए कई विकास कार्य अब भी अधूरे बताए जा रहे हैं।

कई परियोजनाएं अब भी निर्माणाधीन

धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने 130 विकास कार्यों का प्रस्ताव दिया था। इनमें से 21 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि अधिकांश कार्यों पर अभी काम जारी है। परभणी के सांसद संजय जाधव के 81 प्रस्तावित कार्यों में से 25 पूरे हुए हैं और बाकी परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं।

शिरडी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे के मामले में भी बड़ी संख्या में परियोजनाएं लंबित हैं। उन्होंने 137 कार्यों की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक केवल दो परियोजनाएं पूरी हुई हैं। इसी तरह यवतमाल से सांसद संजय देशमुख द्वारा सुझाए गए 113 कार्यों में से सिर्फ सात पूरे होने की जानकारी सामने आई है।

सांसदों ने दी अपनी सफाई

आंकड़ों पर उठ रहे सवालों के बीच कुछ सांसदों ने अपना पक्ष भी रखा है। नागेश पाटिल आष्टीकर का कहना है कि उपलब्ध जानकारी को संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है। उनके अनुसार, लोकसभा क्षेत्र की जरूरतों की तुलना में सांसद निधि की राशि सीमित होती है और बड़े विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार तथा अन्य योजनाओं से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ती है।

वहीं, ओमराजे निंबालकर ने कहा कि उनके काम का मूल्यांकन केवल हालिया अवधि के आधार पर करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कार्यकाल के दौरान उन्हें आवंटित पूरी राशि का उपयोग किया गया था और वर्तमान रिपोर्ट सीमित अवधि के आंकड़ों पर आधारित है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए बागी सांसदों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध था, तो उसका पूरा उपयोग क्यों नहीं किया गया। राउत ने यह भी पूछा कि जिन कारणों का हवाला देकर राजनीतिक फैसला लिया गया, क्या वे उपलब्ध आंकड़ों से मेल खाते हैं।

फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों और सांसदों की सफाई के बीच वास्तविक स्थिति को लेकर बहस जारी है।

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