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WestBengalPolitics – बंगाल में नए कानूनों की चर्चा के बीच सियासी बयानबाजी तेज

WestBengalPolitics – पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए कानूनी प्रस्तावों और राजनीतिक बयानों को लेकर बहस तेज हो गई है। सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून लाने, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

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कार्यक्रम में उठाए गए सीमा और सुरक्षा के मुद्दे

रवींद्र सदन में आयोजित ‘वंदे मातरम’ गीत की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी ने सीमा पार से होने वाली कथित अवैध घुसपैठ को राज्य के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इससे जनसांख्यिकीय बदलाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC जैसे विषयों पर आगे कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के प्रावधानों के अनुसार नागरिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 1975 के आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 9 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के नए कार्यालय का उद्घाटन भी किया।

महुआ मोइत्रा ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

शुभेंदु अधिकारी के बयानों के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बातचीत में प्रस्तावित कानूनी प्रावधानों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विपक्षी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसके कुछ प्रावधान नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उनका आरोप था कि इस कानून के तहत केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखने की आशंका बन सकती है। उन्होंने इसकी तुलना पहले लागू रहे कुछ कड़े कानूनों से भी की और न्यायिक सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाए।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

भाजपा नेताओं ने टीएमसी के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि प्रस्तावित कानूनों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और संगठित अपराध पर नियंत्रण करना है। पार्टी का कहना है कि ऐसे प्रावधानों से जबरन वसूली, हिंसक गतिविधियों और संगठित अपराध के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

भाजपा नेताओं के अनुसार, यदि दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों से उसकी भरपाई कराई जा सकती है। फिलहाल इन मुद्दों को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और विभिन्न दल अपने-अपने पक्ष को मजबूती से सामने रख रहे हैं।

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