बिहार

Encounter – भरत तिवारी मामले में न्याय की मांग तेज, परिजनों ने जांच पर उठाए सवाल

Encounter – भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी की तेरहवीं मंगलवार को आयोजित की गई। इस मौके पर परिवार ने एक बार फिर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई। भरत की मां आशा देवी ने कहा कि बेटे की मौत के बाद भी अब तक किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे परिवार खुद को न्याय से दूर महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें केवल न्यायालय से ही निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद है।

bharat tiwari encounter justice demand

मां ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर जताई नाराजगी

तेरहवीं के दौरान भावुक माहौल में आशा देवी ने कहा कि परिवार लगातार कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होनी है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी समान रूप से आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि परिवार न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

पिता ने एसपी को हटाने की उठाई मांग

भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा कि घटना से जुड़े तथ्यों पर पहले ही व्यापक चर्चा हो चुकी है, ऐसे में केवल जांच की बात कहना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए भोजपुर के पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक जिले से हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव पड़ने की आशंका कम होगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला

तेरहवीं और श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच इस मामले को लेकर आंदोलन का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने की बात कही। इसी क्रम में 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अधिवक्ता ने निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार हत्या सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच ही लोगों का भरोसा कायम रख सकती है।

न्याय संघर्ष समितियों के गठन की घोषणा

आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए कुल 11 न्याय संघर्ष समितियों के गठन की घोषणा की गई। इनमें मुख्य समिति की जिम्मेदारी अधिवक्ता अनिल मिश्रा को सौंपी गई है। आरा सिविल कोर्ट के अधिवक्ता नागेश्वर दुबे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को सह-संयोजक की भूमिका दी गई है। समिति का उद्देश्य मामले की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना बताया गया है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.