MonsoonHealth – बारिश के मौसम में इन बीमारियों से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
MonsoonHealth – मानसून जहां भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं कई मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। लगातार बारिश, बढ़ी हुई नमी और कई स्थानों पर जलभराव होने से बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए साफ-सफाई, संतुलित खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकती है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
बारिश के दिनों में यदि तेज बुखार के साथ ठंड लगना, शरीर या जोड़ों में दर्द महसूस हो तो यह मलेरिया, डेंगू या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। वहीं उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन फूड पॉइजनिंग, डायरिया या हैजा जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। लगातार तेज बुखार, भूख कम लगना और पेट दर्द टाइफाइड की ओर इशारा कर सकते हैं। इसके अलावा आंखों में लालिमा, जलन या लगातार पानी आना आई फ्लू के लक्षण माने जाते हैं। ऐसे किसी भी संकेत पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहता है।
स्वच्छता अपनाकर कम किया जा सकता है जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संक्रमण से बचाव के लिए नियमित हाथ धोना सबसे जरूरी आदतों में से एक है। बाहर से घर लौटने, भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ साफ करने चाहिए। यदि साबुन और पानी उपलब्ध न हो तो अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का उपयोग किया जा सकता है। बारिश में भीगने के बाद घर पहुंचकर साफ पानी और साबुन से स्नान करना भी त्वचा संबंधी संक्रमण से बचाव में मदद करता है।
खानपान में बरतें अतिरिक्त सावधानी
बरसात के मौसम में भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हरी सब्जियों और फलों को उपयोग से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है, क्योंकि उनमें मिट्टी, कीटाणु या छोटे कीड़े मौजूद हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ताजा और घर का बना भोजन खाने की सलाह देते हैं। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन, खुले में बिकने वाला स्ट्रीट फूड, पहले से कटे फल और खुले जूस का सेवन संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। भोजन तैयार होने के कुछ समय के भीतर उसका सेवन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली मौसमी संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए अदरक, लहसुन, हल्दी, तुलसी और काली मिर्च जैसी सामग्री को नियमित भोजन में शामिल किया जा सकता है। दिन में एक बार तुलसी, दालचीनी या गिलोय से तैयार पेय अथवा ग्रीन टी का सेवन भी लाभदायक माना जाता है। विटामिन-सी से भरपूर संतरा, नींबू, मौसमी और आंवला जैसे फल भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन देते हैं। साथ ही पूरे दिन उबला हुआ या गुनगुना पानी पीने की आदत संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है।
छोटी सावधानियां दे सकती हैं बड़ा लाभ
मानसून के दौरान पैरों की सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गंदे पानी के संपर्क में सबसे पहले पैर ही आते हैं। बाहर से लौटने के बाद पैरों को अच्छी तरह धोकर सुखाना संक्रमण से बचाव में मदद करता है। यदि बुखार, उल्टी, दस्त या अन्य लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है। समय पर सावधानी और स्वच्छ आदतें अपनाकर मानसून के मौसम में स्वस्थ रहा जा सकता है।