ITR Filing – नए टैक्स कानून के बावजूद इस बार पुराने नियमों से ही भरना होगा रिटर्न
ITR Filing- नया आयकर कानून लागू होने के बावजूद मौजूदा आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पहले से लागू आयकर अधिनियम 1961 के नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएगी। इसे लेकर कई करदाताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब नया कानून प्रभावी हो चुका है, तब भी पुराने प्रावधानों के आधार पर रिटर्न क्यों भरा जा रहा है। इसकी वजह आय और संबंधित वित्तीय वर्ष से जुड़ी कानूनी व्यवस्था है।

वित्तीय वर्ष के आधार पर तय होते हैं नियम
आयकर रिटर्न पर कौन-सा कानून लागू होगा, इसका निर्णय इस बात से होता है कि आय किस वित्तीय वर्ष में अर्जित की गई है। वर्तमान में दाखिल किए जा रहे रिटर्न असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए हैं, जिनका संबंध वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय से है। यह वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ था और उस समय तक आयकर अधिनियम 1961 ही प्रभावी था। इसलिए टैक्स की गणना, उपलब्ध छूट, कटौतियां और अन्य सभी प्रावधान उसी कानून के अनुसार लागू होंगे।
नया कानून अभी इस रिटर्न पर लागू नहीं
हालांकि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है, लेकिन इसका प्रभाव केवल उन आय पर पड़ेगा जो 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद के टैक्स वर्ष में अर्जित की जाएंगी। इसलिए मौजूदा रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में किसी भी करदाता को नए कानून के आधार पर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है।
क्या इस साल दो बार ITR दाखिल करनी होगी?
नए कानून को लेकर यह भ्रम भी सामने आया है कि क्या करदाताओं को एक ही वर्ष में दो अलग-अलग आयकर रिटर्न दाखिल करनी पड़ेंगी। ऐसा नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय के लिए केवल एक ही ITR दाखिल की जाएगी और वह भी आयकर अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अनुसार ही मान्य होगी। अतिरिक्त रिटर्न दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पहली बार कब लागू होगा नया आयकर अधिनियम?
आयकर अधिनियम 2025 के तहत पहली बार रिटर्न उन आय पर दाखिल किया जाएगा जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए टैक्स वर्ष के दौरान अर्जित होंगी। यानी अगले फाइलिंग सीजन में करदाताओं को नए कानून के अनुरूप जारी किए गए ITR फॉर्म का उपयोग करना होगा। फिलहाल असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जारी मौजूदा फॉर्म ही मान्य रहेंगे और इन्हीं के माध्यम से रिटर्न दाखिल की जाएगी।