CrudeOil – वैश्विक तनाव से महंगा हुआ ईंधन, भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर…
CrudeOil– पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इसका असर कई देशों में ईंधन की खुदरा कीमतों पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और पाकिस्तान समेत कई देशों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, भारत में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को अभी राहत मिल रही है।

कच्चे तेल की तेजी का असर अमेरिका में दिखा
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद अमेरिका में नियमित पेट्रोल की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 4 डॉलर प्रति गैलन हो गई। इससे पहले एक वर्ष पूर्व यही औसत करीब 3.14 डॉलर प्रति गैलन थी। मार्च के दौरान भी कीमतें 4 डॉलर के स्तर को पार कर चुकी थीं, हालांकि बाद में कुछ समय के लिए नरमी देखने को मिली थी। अब नए घटनाक्रमों के बाद ईंधन की कीमतों में फिर तेजी लौट आई है।
पाकिस्तान ने बढ़ाए पेट्रोल और डीजल के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बाद पाकिस्तान सरकार ने भी घरेलू ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की है। नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद वहां पेट्रोल का खुदरा मूल्य 310.71 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके विपरीत भारत में फिलहाल ईंधन की दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
कई देशों में पेट्रोल 150 रुपये प्रति लीटर से ऊपर
अंतरराष्ट्रीय ईंधन मूल्य आंकड़ों के अनुसार कई देशों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं। दक्षिण अफ्रीका, साइप्रस, यूक्रेन, स्पेन और इटली जैसे देशों में एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 150 रुपये से 200 रुपये के बीच बनी हुई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर इन देशों के खुदरा ईंधन बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।
भारत पर क्या पड़ सकता है प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाते के संतुलन पर भी दबाव बढ़ सकता है। साथ ही भविष्य में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन की लागत प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
शिपिंग लागत और महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव
समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण कई जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन, परिवहन, चालक दल और बीमा की लागत बढ़ रही है। निर्यातकों के अनुसार कई अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं और कुछ मामलों में ऑर्डर भी प्रभावित हुए हैं। परिवहन लागत बढ़ने का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, औद्योगिक उत्पादों, उर्वरक, रसायन और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यदि वैश्विक परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।