President – कार्यकाल पूरा होने से पहले बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा
President- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनका कार्यकाल अभी लगभग दो वर्ष शेष था, लेकिन उन्होंने तय समय से पहले पद छोड़ने का फैसला किया। हाल के दिनों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से कथित संपर्क की खबरों के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। हालांकि, राष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है। उनके इस फैसले के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नए घटनाक्रम की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

स्वास्थ्य का हवाला देकर पद छोड़ा
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के एक प्रवक्ता ने बताया कि उनका त्यागपत्र संसद अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद को भेजा गया है। संविधान के प्रावधानों के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के निर्वाचन तक संसद अध्यक्ष कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे। आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस्तीफे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
शेख हसीना से जुड़े विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
राष्ट्रपति के इस्तीफे से पहले ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि इलाज के दौरान लंदन प्रवास में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से संपर्क करने का प्रयास किया था। इन खबरों के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हुई और विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर सवाल उठने लगे। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की चर्चाएं लगातार होती रहीं।
हसीना सरकार के दौरान संभाला था सर्वोच्च पद
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उन्हें उस समय की संसद ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए चुना था। इससे पहले वे न्यायिक सेवा से जुड़े रहे और 1971 के मुक्ति संग्राम में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया जाता है। वर्ष 2024 में छात्र आंदोलनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जब शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हुई, तब भी शहाबुद्दीन अपने संवैधानिक पद पर बने रहे। पांच अगस्त 2024 के बाद शेख हसीना भारत चली गई थीं और तब से वहीं रह रही हैं।
राष्ट्रपति पद को लेकर पहले भी उठी थी मांग
राजनीतिक परिवर्तन के बाद कई संगठनों और छात्र समूहों ने राष्ट्रपति को पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि उस समय अंतरिम सरकार ने संवैधानिक सीमाओं का हवाला देते हुए ऐसा कदम नहीं उठाया। इसके बाद फरवरी में हुए संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत के साथ नए राजनीतिक समीकरण बने और राष्ट्रपति पद को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गईं। मार्च में पार्टी नेताओं ने कहा था कि कार्यकाल पूरा होने तक इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा, लेकिन अब शहाबुद्दीन के इस्तीफे के साथ यह अध्याय नए मोड़ पर पहुंच गया है। फिलहाल देश में नए राष्ट्रपति के चयन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।