NiravModi – प्रत्यर्पण में देरी पर प्रीति पटेल ने जताई चिंता, ब्रिटिश व्यवस्था पर उठाए सवाल
NiravModi– भारत से जुड़े चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी के ब्रिटेन में अब तक बने रहने पर भारतीय मूल की ब्रिटिश सांसद और पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण आदेश पर वर्षों पहले हस्ताक्षर किए जाने के बावजूद आरोपी का अभी तक भारत नहीं पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, इस लंबी कानूनी प्रक्रिया से भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग की धारणा भी प्रभावित हुई है।

पॉडकास्ट में साझा किए अपने अनुभव
ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी में छाया विदेश मंत्री की भूमिका निभा रहीं प्रीति पटेल ने एक पॉडकास्ट में इस मुद्दे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्यर्पण व्यवस्था अपेक्षित गति और प्रभावशीलता से काम करती, तो नीरव मोदी को अब तक भारत भेजा जा चुका होता। उनके मुताबिक, मामले में लगातार हो रही देरी से भारतीय एजेंसियों में असंतोष की भावना होना स्वाभाविक है।
कानूनी विकल्प लगभग समाप्त
55 वर्षीय नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में भारत में वांछित है। वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसने ब्रिटेन की न्यायिक व्यवस्था में उपलब्ध प्रमुख कानूनी विकल्पों का उपयोग कर लिया है। यूरोपीय मानवाधिकार अदालत में भी उसकी अंतिम अपील खारिज हो चुकी है, जिससे उसके प्रत्यर्पण की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है।
भारत-ब्रिटेन संबंधों पर भी पड़ा असर
प्रीति पटेल ने कहा कि जब वह ब्रिटेन की गृह मंत्री थीं, उस दौरान यह मामला उनके लिए कूटनीतिक स्तर पर भी चुनौती बना रहा। उनके अनुसार, भारत के साथ कई प्रशासनिक और आव्रजन संबंधी मुद्दों पर बातचीत के दौरान इस हाई-प्रोफाइल केस का असर महसूस किया जाता था। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक इस मामले में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तब तक अन्य द्विपक्षीय विषयों पर भी अपेक्षित गति से सहयोग नहीं मिल पाया।
तीन अलग-अलग मामलों में है जांच
भारत में नीरव मोदी के खिलाफ कई एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) उस पर पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच कर रहा है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) कथित धनशोधन के आरोपों की जांच में जुटा है। इसके अलावा सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों को लेकर भी उसके खिलाफ अलग मामला दर्ज है।
ब्रिटिश कानूनी व्यवस्था पर की टिप्पणी
प्रीति पटेल ने कहा कि प्रत्यर्पण कानूनों का उद्देश्य ऐसे मामलों में आरोपियों को उस देश की न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करना है, जहां उनके खिलाफ मुकदमे लंबित हैं। उन्होंने माना कि इस मामले में अत्यधिक देरी ने ब्रिटेन की कानूनी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए भी ऐसे मामलों का समयबद्ध निष्पादन जरूरी है।
शरण आवेदन से बढ़ी थी प्रक्रिया की अवधि
नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में देरी का एक प्रमुख कारण उसका शरण आवेदन और मानवाधिकार संबंधी कानूनी अपीलें भी रहीं। रिपोर्टों के अनुसार, शरण संबंधी आवेदन खारिज होने के बाद उसने इंग्लैंड के उच्च न्यायालय में अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की कोशिश की थी, लेकिन इस वर्ष मार्च में अदालत ने उस अनुरोध को भी स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना और मजबूत मानी जा रही है।