Wildlife Conflict – उत्तराखंड में खतरनाक वन्यजीवों पर सख्ती, 16 को मिली मारने की मंजूरी
Wildlife Conflict – उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने कई खतरनाक वन्यजीवों के खिलाफ विशेष कार्रवाई शुरू की है। विभाग ने 13 गुलदार और तीन भालुओं को मारने की अनुमति जारी की है। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय उन मामलों में लिया गया है, जहां संबंधित वन्यजीवों को पकड़ने या आबादी वाले क्षेत्रों से दूर हटाने के सभी प्रयास सफल नहीं हो सके। अब तक इस अभियान के तहत पौड़ी जिले में एक गुलदार को मार गिराया गया है।

सात महीनों में 118 वन्यजीवों की पहचान
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के पहले सात महीनों में कुल 118 ऐसे वन्यजीवों की पहचान की गई है, जिन्हें मानव जीवन के लिए जोखिमपूर्ण माना गया है। इनमें 90 गुलदार, 21 बाघ और आठ भालू शामिल हैं। विभाग ने बाघों को मारने के बजाय उन्हें पकड़ने के निर्देश दिए हैं, जबकि कुछ गुलदार और भालुओं के मामले में अंतिम विकल्प के रूप में मारने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ये जानवर कई बार आबादी वाले इलाकों में प्रवेश कर चुके हैं और कुछ घटनाओं में लोगों पर हमले भी कर चुके हैं।
अंतिम विकल्प के रूप में दी जाती है अनुमति
वन विभाग का कहना है कि किसी भी संरक्षित वन्यजीव को मारने का फैसला सामान्य प्रक्रिया नहीं है। पहले उसे पकड़ने, बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने या जंगल की ओर खदेड़ने जैसे सभी विकल्प अपनाए जाते हैं। जब इन उपायों से भी खतरा कम नहीं होता, तभी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) की स्वीकृति के बाद ऐसी कार्रवाई की अनुमति दी जाती है। विभाग का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।
बढ़ते हमलों से सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
उत्तराखंड के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से गुलदार, बाघ और भालुओं का आबादी वाले इलाकों की ओर आना बढ़ा है। इसके कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वन अधिकारियों का मानना है कि जोखिम वाले जानवरों की समय पर पहचान और आवश्यक कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
एक दशक के आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 से अब तक बाघ और गुलदार के हमलों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। अलग-अलग वर्षों में गुलदार के हमलों में सबसे अधिक मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि हाल के वर्षों में बाघों के हमलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2026 में अब तक बाघ के हमलों में 12 और गुलदार के हमलों में 16 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिससे वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है।
दस वर्षों में 327 लोगों की गई जान
वन विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले दस वर्षों में वन्यजीवों के हमलों में कुल 327 लोगों की मृत्यु हुई है। इनमें सबसे अधिक मामले गुलदार के हमलों से जुड़े रहे हैं। विभाग का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, गश्त और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से भी अपील की जा रही है कि वन क्षेत्रों के आसपास सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वन्यजीव की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।