Sawan2026 – 30 जुलाई से शुरू होगा सावन, जानें पहले दिन शिव पूजा का शुभ समय
Sawan2026 – भगवान शिव को समर्पित सावन का पावन महीना इस वर्ष 30 जुलाई 2026, गुरुवार से आरंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरा महीना शिव आराधना, जलाभिषेक, व्रत और ध्यान के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस अवधि में विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की उपासना करने से वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। कई श्रद्धालु इसी समय से 16 सोमवार व्रत का संकल्प भी लेते हैं।

इस वर्ष कब तक रहेगा सावन
धार्मिक पंचांग के अनुसार, सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन होगा। इस पूरे महीने में शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। वहीं, प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व माना गया है, जो माता पार्वती को समर्पित होता है।
पहले दिन शिव पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
सावन के प्रथम दिन भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 बजे से 5:46 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या का समय सुबह 5:28 बजे से 6:21 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:26 बजे से 2:27 बजे तक रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त रात 9:32 बजे से 9:50 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार इन शुभ समयों में पूजा कर सकते हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके शिवलिंग पर जल, गंगाजल, बेलपत्र, चंदन, अक्षत, भांग, धतूरा, दही, घी, शहद, शक्कर और पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। अंत में नैवेद्य अर्पित कर आरती करें। श्रद्धालु चाहें तो शिव चालीसा या अन्य स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं।
इन मंत्रों का जाप माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में शिव मंत्रों का नियमित जाप विशेष फलदायी माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करने की परंपरा है। माना जाता है कि इन मंत्रों के स्मरण से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
भगवान शिव को क्या अर्पित करें
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को मालपुआ, खीर और ठंडाई का भोग प्रिय माना जाता है। इसके अलावा पंचामृत, मौसमी फल और मिठाइयों का भोग भी श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जा सकता है। पूजा के अंत में “ॐ जय शिव ओंकारा” आरती का गायन करने की परंपरा है, जिसे शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ गाते हैं।