Insurance – बिना बीमा वाले वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए सख्त उपाय
Insurance– देशभर में बड़ी संख्या में बिना वैध बीमा के चल रहे वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन कानून के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होने के बावजूद करोड़ों वाहन इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय और बीमा नियामक IRDAI को कई तकनीकी और प्रशासनिक उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया है।

16 करोड़ से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध सरकारी आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पंजीकृत करीब 30.4 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.5 करोड़ के पास वैध बीमा नहीं है। इनमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की बताई गई है। अदालत ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया ऐसे मामलों में और अधिक कठिन हो जाती है।
पेट्रोल पंप पर ईंधन को बीमा से जोड़ने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने एक पायलट परियोजना पर विचार करने की बात कही है, जिसके तहत वाहन को ईंधन देने की प्रक्रिया उसके वैध बीमा रिकॉर्ड से जोड़ी जा सकती है। यदि किसी वाहन का बीमा समाप्त हो चुका है, तो उसे पेट्रोल या डीजल उपलब्ध कराने पर रोक लगाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। अदालत ने कहा कि इस कदम से वाहन मालिक समय पर अपना बीमा नवीनीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे। बताया गया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सिद्धांततः सहमति जताई है।
ANPR कैमरों से होगी पहचान
अदालत ने निर्देश दिया कि सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगे ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को Insurance Information Bureau और VAHAN पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान की जा सकेगी और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकेगा। वर्तमान में इन कैमरों का उपयोग ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट उल्लंघन और अन्य यातायात नियमों की निगरानी के लिए किया जाता है।
ट्रैफिक पुलिस को भी मिलेगी डिजिटल सुविधा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि यातायात पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड उपकरण या मोबाइल एप उपलब्ध कराए जाएं, जिनकी मदद से मौके पर ही किसी भी वाहन का बीमा स्टेटस जांचा जा सके। अदालत का मानना है कि इससे नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने में आसानी होगी और जांच प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी बनेगी।
कानून में पहले से है जुर्माने और सजा का प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। पहली बार पकड़े जाने पर तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि वही व्यक्ति दोबारा इस नियम का उल्लंघन करता है, तो 4,000 रुपये तक का जुर्माना, तीन महीने तक की सजा या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
नए वाहनों के लिए बढ़ाई गई बीमा अवधि
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में भी संशोधन किया है। वर्ष 2018 में नए चारपहिया वाहनों के लिए तीन वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य किया गया था। अब अदालत ने इस अवधि में एक-एक वर्ष की बढ़ोतरी का निर्देश दिया है। नए आदेश के अनुसार, नई कार खरीदने पर चार वर्ष और नए दोपहिया वाहन पर छह वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा लेना अनिवार्य होगा।