FCRABill – संसद गतिरोध खत्म करने को सरकार ने बढ़ाया संवाद का प्रस्ताव
FCRABill- संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने विपक्ष के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पहल की है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill) के कुछ प्रावधानों को लेकर उठी आशंकाओं पर विचार किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कोई प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा, जिसका प्रभाव पुराने मामलों या पहले से किए गए निवेश पर पड़े।

सरकार और विपक्ष के बीच हुई अहम बातचीत
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की। इस दौरान संसद के लंबित विधायी कार्यों और सदन की कार्यवाही को सामान्य बनाने पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि मानसून सत्र के शेष दिनों में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
FCRA विधेयक पर क्या हैं प्रमुख आपत्तियां
प्रस्तावित संशोधन को लेकर कई सामाजिक, धार्मिक और गैर-सरकारी संगठनों ने चिंता जताई है। विशेष रूप से धारा 14B के तहत FCRA प्रमाणपत्र की “समाप्ति” से जुड़े प्रावधान पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ संगठनों का मानना है कि यदि किसी संस्था का पंजीकरण समाप्त होता है तो विदेशी सहायता से निर्मित उसकी संपत्तियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है। इसी विषय पर कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री से भी मुलाकात की थी।
सरकार ने आशंकाओं पर दी सफाई
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य किसी संस्था की संपत्ति का अधिग्रहण करना नहीं है। उनके अनुसार, यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण समाप्त या रद्द होता है तो केवल अंतरिम व्यवस्था के तहत उसके कामकाज को व्यवस्थित रखने का प्रावधान किया जाएगा। अधिकारी ने यह भी कहा कि संबंधित संस्था के अधिकार बहाल होने पर संपत्ति उसी को वापस सौंप दी जाएगी और धार्मिक संस्थानों का संचालन उनकी परंपराओं के अनुरूप ही जारी रहेगा।
विपक्ष ने रखीं अपनी प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान विपक्ष ने संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने को लेकर तत्काल कोई सहमति नहीं दी। विपक्ष अपने पहले से घोषित रुख पर कायम है। उसकी प्रमुख मांगों में 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संसद में बयान और अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित मामले पर सदन में चर्चा शामिल है।
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख कायम
बैठक में परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन का विषय भी उठा। कांग्रेस ने सरकार को स्पष्ट कर दिया कि वह मौजूदा स्वरूप में परिसीमन के पक्ष में नहीं है। हालांकि किरेन रिजिजू ने पार्टी से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। इस बीच, कांग्रेस विभिन्न विपक्षी दलों के साथ इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने के लिए अनौपचारिक स्तर पर बातचीत कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई चर्चा
प्रस्तावित FCRA संशोधन को लेकर विदेशों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद रिले मूर ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलावों का प्रभाव धार्मिक संस्थाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण विषय बताया। हालांकि भारत सरकार की ओर से दोहराया गया है कि विधेयक का उद्देश्य संस्थाओं के नियमित संचालन के लिए कानूनी स्पष्टता और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है, न कि किसी धार्मिक या सामाजिक संगठन के अधिकारों में हस्तक्षेप करना।