Team India – लगातार चोटों से बढ़ी चिंता, खिलाड़ियों की फिटनेस पर उठे सवाल
Team India को हाल के समय में खिलाड़ियों की चोटों से लगातार जूझना पड़ा है। भारत को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, लेकिन टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी फिटनेस से जुड़ी परेशानियों के कारण उपलब्ध नहीं हैं। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, साई सुदर्शन और नितीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनी-अपनी चोटों से उबरने की प्रक्रिया में हैं। बुमराह और सुदर्शन को चोट के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर होना पड़ा है, जिससे भारतीय टीम के सामने उपलब्ध खिलाड़ियों को लेकर चुनौती बढ़ गई है।

आईपीएल के दबाव पर सामने आया बड़ा दावा
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े एक सूत्र ने खिलाड़ियों पर बढ़ते क्रिकेट भार को चोटों की बड़ी वजहों में से एक बताया। सूत्र के अनुसार, लगातार क्रिकेट खेलने से शरीर पर दबाव बढ़ता है और खासकर उम्रदराज खिलाड़ियों में अधिक इस्तेमाल तथा तनाव से जुड़ी चोटों का खतरा रहता है। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया कि आईपीएल के दौरान फ्रेंचाइजी और आर्थिक दबाव के कारण कुछ खिलाड़ी चोट के बावजूद मैदान पर उतरते हैं। इसके बाद उनके उपचार और पुनर्वास की जिम्मेदारी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के चिकित्सा दल पर आ जाती है।
सूत्र ने यह भी कहा कि टीम के फिजियो और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की चिकित्सा टीम खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। हालांकि, जब कई प्रमुख खिलाड़ी एक साथ चोटिल होते हैं तो इसका असर चयनकर्ताओं, प्रशिक्षकों और कप्तान की योजनाओं पर भी पड़ता है। किसी खिलाड़ी की वापसी की तारीख पहले से तय करना हमेशा आसान नहीं होता, क्योंकि चोट से उबरने की गति हर खिलाड़ी के मामले में अलग हो सकती है।
वीवीएस लक्ष्मण ने प्रक्रिया को लेकर दी सफाई
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख और पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने भी खिलाड़ियों की धीमी रिकवरी को लेकर संस्थान पर सवाल उठाने से बचने की बात कही। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि फिटनेस और वापसी से जुड़ी समयसीमा खिलाड़ियों की स्थिति और तय दिशानिर्देशों के आधार पर बनाई जाती है, लेकिन मानव शरीर को मशीन की तरह नहीं देखा जा सकता। हर खिलाड़ी निर्धारित समय के भीतर चोट से पूरी तरह उबर जाए, यह जरूरी नहीं है।
लक्ष्मण के अनुसार, खिलाड़ी की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाती है और उसकी स्थिति के मुताबिक प्रशिक्षण का भार धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। चोट से रिकवरी शुरू होने से लेकर फिट घोषित किए जाने और सेंटर से बाहर जाने तक इसी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। उन्होंने जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ी रिपोर्ट चयनकर्ताओं को भेजी जाती है। यह जानकारी चयन समिति के अध्यक्ष, दोनों टीमों के मुख्य प्रशिक्षकों और बीसीसीआई के साथ साझा की जाती है।
लगातार चोटें टीम प्रबंधन के लिए चुनौती
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ समय से चोटिल खिलाड़ियों की लंबी सूची चिंता का विषय बनी हुई है। श्रीलंका टेस्ट सीरीज जैसे महत्वपूर्ण दौरे से पहले प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपलब्धता टीम संयोजन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में खिलाड़ियों की उपलब्धता, कार्यभार प्रबंधन और चोट से पूरी तरह उबरने के बीच संतुलन बनाना टीम प्रबंधन के लिए अहम रहेगा। फिलहाल नजर इस बात पर है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मौजूद खिलाड़ी कब तक पूरी तरह फिट होकर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी कर पाते हैं।